होमगार्ड ड्यूटी में धांधली: वर्तमान कमिश्नर और PA ने एक ही जवान को लगाने के लिए दो दिन तक किए फोन

अलवर नगर निगम में गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। एक RTI के जरिए खुलासा हुआ कि पूर्व नगर निगम आयुक्त जितेंद्र नरूका के फर्जी हस्ताक्षर करके होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय को पांच बार ड्यूटी आदेश भेजे गए।

इन फर्जी आदेशों के आधार पर नगर निगम में एक महिला होमगार्ड मनीषा जादोन और पुरुष होमगार्ड संजय शर्मा की लगातार ड्यूटी लगती रही, जबकि अन्य होमगार्ड्स को मौका नहीं दिया गया।

फर्जी आदेशों की पूरी टाइमलाइन

RTI में मिले रिकॉर्ड के अनुसार, आयुक्त के फर्जी साइन से भेजे गए पत्र इन तिथियों पर जारी हुए—

  • 31 दिसंबर 2024
  • 27 फरवरी 2025
  • 18 मार्च 2025
  • 28 अप्रैल 2025
  • 20 मई 2025

इन सभी लेटरों में केवल दो होमगार्ड—मनीषा जादोन और संजय शर्मा—की ड्यूटी दर्ज है। इसी आधार पर दोनों को महीनों तक एक ही स्थान पर लगातार ड्यूटी पर रखा गया।

वर्तमान आयुक्त और PA की भूमिका पर भी उठे सवाल

RTI में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

  • 29 अक्टूबर 2025: वर्तमान नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका के PA सुरेश ने होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय को कॉल कर संजय को फिर से ड्यूटी पर लगाने के निर्देश दिए।
  • 30 अक्टूबर 2025: अगले ही दिन खुद आयुक्त सोहन सिंह नरूका ने भी संजय को ड्यूटी पर लगाने के लिए कहा।

यह स्थिति फर्जी आदेशों और मौखिक निर्देशों की मिलीभगत की ओर संकेत करती है।

कमिश्नर का बयान: फर्जी साइन वाले लेटर असत्यापित वापस भेजे

  • नगर निगम कमिश्नर सोहन सिंह नरूका ने स्वीकार किया कि
  • “होमगार्ड कार्यालय से वेरिफिकेशन के लिए लौटाए गए कुछ लेटर्स में फर्जी साइन थे। उन्हें असत्यापित कर वापस भेज दिया गया है।”
  • हालांकि अब तक किसी कर्मचारी या अधिकारी पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई है।

अन्य होमगार्ड्स का आरोप—‘चहेतों को परमानेंट ड्यूटी’

एक होमगार्ड ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि:

  • दोनों होमगार्ड वर्षों से लगातार ड्यूटी पर हैं।
  • बाकी गार्ड्स की ड्यूटी कभी-कभार लगती है।

अधिकारियों की मिलीभगत से चहेते लोगों को “लगातार परमानेंट” जैसा काम दिया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई कब होगी?

इतने बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद भी नगर निगम की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

  • फर्जी दस्तावेज कौन बना रहा था?
  • किसके कहने पर लगातार दो ही गार्ड्स को ड्यूटी दी जा रही थी?
  • क्या निगम इस मामले में कोई सख्त कदम उठाएगा?

फर्जी आदेशों की चेन, मौखिक निर्देशों में विरोधाभास और कार्रवाई के अभाव ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

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