गंगनहर के 100 साल: राजस्थान में पानी लाने के लिए महाराजा का वर्ल्ड वॉर में उतरना बना इतिहास

राजस्थान की ऐतिहासिक गंगनहर आज 100 साल पुरानी हो चुकी है। छप्पनिया अकाल के समय यह नहर लाखों लोगों के लिए जीवन का साधन बनी। बाद में इसी मॉडल पर इंदिरा गांधी नहर का निर्माण हुआ, जो आज करीब 2 करोड़ लोगों को पानी उपलब्ध करवाती है।

गंगनहर का पानी 144 किलोमीटर दूर पंजाब के फिरोजपुर से लाया गया था। इसके निर्माण पर 100 साल पहले महाराजा गंगा सिंह ने 5.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे—जो उस समय बहुत बड़ी राशि थी।

अकाल में किसानों की मौत, महाराजा ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

छप्पनिया अकाल के दौरान भीषण सूखे के कारण लोग पानी के बिना दम तोड़ने लगे। हालात इतने खराब थे कि स्थिति आज के कोरोना काल जैसी भयावह बताई जाती है।
महाराजा गंगा सिंह ने तब तय किया कि पंजाब की सतलुज नदी का पानी बीकानेर तक लाया जाएगा। इसके लिए कैनाल निर्माण ही एकमात्र समाधान था।

दो साल में बना चमत्कार, बदल दी गंगानगर की तस्वीर

महाराजा गंगा सिंह की पड़पौत्री और अर्जुन अवॉर्ड विजेता राज्यश्री कुमारी बताती हैं कि महज दो साल में कैनाल बनकर तैयार हो गई और पानी बीकानेर पहुंच गया।
यही कारण है कि आज गंगानगर प्रदेश के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में गिना जाता है। नहर ने यहां की खेती, जीवन और अर्थव्यवस्था—सभी को बदल दिया।

इंदिरा गांधी नहर का कॉन्सेप्ट भी यहीं से निकला

राज्यश्री कुमारी के अनुसार, 5 दिसंबर 1925 को फिरोजपुर में रखी गई बीकानेर कैनाल की नींव राजस्थान के जल इतिहास का निर्णायक अध्याय है।
यही नहर आगे चलकर राजस्थान कैनाल (आज की इंदिरा गांधी नहर) की प्रेरणा बनी, जिसने पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से को पानी उपलब्ध कराया।

जब महाराजा ने अंग्रेजों और रियासतों को मनाया

1915 के बाद से महाराजा गंगा सिंह सतलुज के पानी को लेकर योजना बना रहे थे। लेकिन पानी साझा करने के लिए पंजाब, बहावलपुर और बीकानेर तीनों की सहमति जरूरी थी।
पंजाब तैयार था, लेकिन बहावलपुर राज्य राज़ी नहीं हुआ। कई दौर की बातचीत और प्रयासों के बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

बाद में वर्ल्ड वॉर के दौरान महाराजा ने अंग्रेजों के साथ अपने मजबूत राजनीतिक संबंधों का उपयोग किया। गंगा सिंह की कार्यशैली से प्रभावित ब्रिटिश शासन ने बीकानेर कैनाल को मंजूरी दे दी और नहर का निर्माण शुरू हुआ।

Related Articles

Back to top button