बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई: ECI ने कहा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में जरूरी नहीं VVPAT

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ को बताया कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में VVPAT मशीनों का उपयोग अनिवार्य नहीं है और तकनीकी रूप से भी यह संभव नहीं है। आयोग ने यह जवाब कांग्रेस नेता प्रफुल्ल गुडाधे द्वारा दायर याचिका पर दिया, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में वीवीपैट का इस्तेमाल न होने के फैसले को चुनौती दी गई है।
याचिका में पारदर्शिता के लिए VVPAT की मांग
गुडाधे ने अपनी याचिका में कहा कि वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) जरूरी है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में वीवीपैट को अनिवार्य बताया है, तब इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा।
EC ने बताया: सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्थानीय निकाय चुनावों पर लागू नहीं
आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर लागू होता है, न कि स्थानीय निकाय चुनावों पर।
उन्होंने यह भी कहा कि 2017 के नगर निगम चुनावों में भी वीवीपैट का उपयोग नहीं किया गया था।
SEC द्वारा दायर हलफनामे में यह भी कहा गया:
- महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय अधिनियमों में वीवीपैट का अनिवार्य प्रावधान नहीं है।
- VVPAT का डिजाइन बहु-सदस्यीय और बहु-पद वाले चुनावों के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं है।
- लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकल सदस्यीय, एकल पद वाले होते हैं, जबकि
- नगर पंचायत,
- नगर परिषद,
- नगर निगम
सभी बहु-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र होते हैं।
“यदि VVPAT नहीं, तो मतपत्र से चुनाव हो”—याचिकाकर्ता की मांग
गुडाधे ने, अधिवक्ता पवन दहत और निहाल सिंह राठौड़ के माध्यम से, यह मांग की कि यदि SEC VVPAT का उपयोग नहीं करता है, तो चुनाव मतपत्र (बैलेट पेपर) से कराए जाएं।
अगली सुनवाई गुरुवार को
कोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है।
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का पहला चरण 2 दिसंबर को होना है।





