PM-KISAN की 21वीं किस्त जारी, मोदी बोले भारतीय किसान बदल रहे कृषि का भविष्य

तमिलनाडु में दक्षिण भारत प्राकृतिक खेती शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने किसानों के उत्साह की सराहना की। उन्होंने मंच पर आते ही किसानों को गमछा लहराते देखा और कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे “बिहार की हवा तमिलनाडु पहुंच गई हो।” हाल ही में बिहार में एनडीए की बड़ी जीत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऊर्जा और उत्साह को देखना उनके लिए काफी प्रेरणादायी है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती का विषय उनके दिल के बेहद करीब है। कार्यक्रम स्थल पर उन्होंने कई किसानों से मुलाकात की—किसी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर खेती शुरू की, तो कोई NASA जैसी प्रतिष्ठित संस्था से लौटकर खेती में नवाचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसानों का साहस और बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
मोदी ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की कृषि में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। देश के युवा खेती को एक आधुनिक, तकनीकी और व्यापक अवसर के रूप में देख रहे हैं। इससे न केवल कृषि की गुणवत्ता बदलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत के कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है और कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे मिट्टी अधिक स्वस्थ रहती है, रसायनों का उपयोग घटता है और किसानों की लागत कम होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन प्राकृतिक खेती को नई गति देगा।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त भी जारी की, जिसके तहत देशभर के किसानों को 18,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के परिश्रम और उनके योगदान का सम्मान है।





