कालीन उद्योग में मंदी की आहट, 30 लाख श्रमिकों पर संकट; यहां 80% परिवार जुड़े हैं इस उद्योग से

भदोही: अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ थोपने के बाद भारतीय कालीन उद्योग में भूचाल आ गया है। 17 हजार करोड़ वाले इस व्यवसाय से जुड़े 30 लाख श्रमिकों के भविष्य पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र से जुड़े कालीन निर्यातकों और मजदूरों पर पड़ेगा। भदोही में करीब 80 फीसदी परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कालीन उद्योग से जुड़े हैं। अमेरिकी टैरिफ से कालीन उद्योग में मंदी के आसार बन रहे हैं।
भारतीय कालीनों के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया था। इस टैरिफ की समस्या का समाधान तलाशने में निर्यातक जुटे ही थे कि इस बीच रूस से तेल आयात पर भारत के स्टैंड को लेकर बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स थोप दिया। इससे अमेरिका में भारतीय सामान 50 फीसदी तक महंगे हो गए। इसके असर से अमेरिका में भारतीय कालीन भी महंगे हाेंगे। इसका असर यहां कालीन निर्माण के सभी पहलुओं पर पड़ेगा। इससे लागत भी लगभग 50 फीसदी बढ़ेगी।
भारतीय कालीन संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के मुताबिक अमेरिका, भारतीय कालीनों के व्यापार में करीब 60 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। देशभर में करीब 17 हजार करोड़ रुपये का कालीन कारोबार होता है। इसमें 10 हजार करोड़ का कारोबार उत्तर प्रदेश और उसमें भी छह हजार करोड़ की हिस्सेदारी भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र की है।
सबसे अधिक रोजगार मुहैया कराने वाले कालीन उद्योग से जुड़े मजदूरों पर अमेरिकी टैरिफ से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मुताबिक कालीन उद्योग देश भर में करीब 30 लाख लोगों को रोजगार देता है। भदोही के तो लगभग हर घर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लोग इसमें जुड़े हैं।
एकमा अध्यक्ष रजा खां के मुताबिक कालीन तैयार करने के लिए 20 चरणों से होकर गुजरना पड़ता है। इसमें कच्चे माल की खरीदारी से लेकर कालीन की फिनिशिंग तक के कार्य शामिल हैं। बताया कि विदेश से कच्चा माल मंगाने के बाद छंटाई, लेफा, एक्सप्लोर से खरीदारी, मजदूरों से कताई, रंगाई, डिजाइनिंग, बुनकरी, आवश्यकता पड़ने पर मरम्मत, क्लिपिंग, धुलाई, फिर से क्लिपिंग, पेंचाई, सफाई, रंगकटा कार्य होते हैं। इसमें भी खुलाई, पेंचाई, लेफा और काती बुनाई का काम अधिकतर महिलाएं ही करती हैं। इससे उन्हें घर बैठे ही रोजगार मिल जाता है।





