Uttar Pradesh में 82 लाख किसानों ने नहीं कराई रजिस्ट्री, MSP पर गेहूं बेचने में संकट

Uttar Pradesh में बड़ी संख्या में किसान अब भी फार्मर रजिस्ट्री से बाहर हैं, जिससे उनके सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने का संकट खड़ा हो गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के करीब 81.95 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है।

राज्य के 75 जिलों में कुल 2,88,70,495 किसानों की रजिस्ट्री होनी है, जिनमें से अब तक केवल 2,06,75,387 किसानों ने ही पंजीकरण कराया है। यह कुल लक्ष्य का लगभग 80.32 फीसदी है। ऐसे में शेष किसानों को न सिर्फ MSP पर फसल बेचने में दिक्कत होगी, बल्कि वे किसान सम्मान निधि, मत्स्य पालन और पशुपालन समेत कई सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं।

राजधानी Lucknow में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां 72,128 किसानों की अब तक रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। जिले में कुल 2,46,043 किसानों में से 1,73,915 ने ही पंजीकरण कराया है, जो लगभग 74.83 फीसदी है।

फार्मर रजिस्ट्री के मामले में रामपुर जिला प्रदेश में अव्वल है, जहां करीब 99.58 फीसदी किसानों ने पंजीकरण पूरा कर लिया है। वहीं, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, एटा और कासगंज भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल हैं। इसके विपरीत सुल्तानपुर, कानपुर देहात, देवरिया, गोरखपुर और कौशाम्बी जैसे जिले रजिस्ट्री में पिछड़े हुए हैं।

प्रदेश सरकार ने किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) को कृषि और उससे जुड़े सभी विभागों की योजनाओं के लिए अनिवार्य कर दिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल के अनुसार, भविष्य में पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तें भी केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगी, जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी। इसके अलावा उर्वरक, बीज, कीटनाशक वितरण और MSP पर गेहूं, दलहन व सरसों की बिक्री के लिए भी यह अनिवार्य कर दिया गया है।

किसान आधार कार्ड, खतौनी की प्रति और आधार से लिंक मोबाइल नंबर के जरिए जनसेवा केंद्र, कृषि विभाग या लेखपाल के माध्यम से रजिस्ट्री करा सकते हैं। इसके अलावा वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी पंजीकरण कर सकते हैं।

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