सुप्रीम कोर्ट पहुंचे CAPF के 111 कैडर अधिकारी, कीर्ति चक्र-शौर्य चक्र सम्मानित अफसर भी याचिका में शामिल

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 111 कैडर अधिकारियों ने सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, राष्ट्रपति पुलिस पदक (PPMG) और पुलिस पदक (PMG) से सम्मानित अधिकारी भी शामिल हैं।
याचिका में अधिकारियों ने नए कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि इससे कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उनका तर्क है कि वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति योग्य कैडर अधिकारियों से होनी चाहिए, न कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले आईपीएस अधिकारियों के माध्यम से।
इस मामले के प्रमुख याचिकाकर्ता सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह हैं, जिन्होंने वर्ष 2022 में बिहार में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। उन्हें वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। कुल मिलाकर इस मामले से जुड़ी 890 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की भावना के विपरीत है, जिसमें सीएपीएफ के ग्रुप ‘ए’ कैडर अधिकारियों को बेहतर पदोन्नति के अवसर देने और आईपीएस प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने की बात कही गई थी। नए कानून में आईजी, एडीजी, एसडीजी और डीजी स्तर के कई पदों पर आईपीएस प्रतिनियुक्ति का प्रावधान रखा गया है, जिसे कैडर अधिकारी अपने अधिकारों के खिलाफ बता रहे हैं।





