निठारी कांड में नया मोड़: सुरेंद्र की आत्महत्या पर परिजनों को भरोसा नहीं, इन बातों से जताई साजिश की आशंका

निठारी कांड के सह आरोपी सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार में एक कमरे में फंदे से लटका मिला था। शनिवार को उसके परिजन हरिद्वार पहुंचे और उसकी मौत को लेकर कई सवाल उठाए। परिजनों की ओर से घटना में साजिश की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
अल्मोड़ा से सुरेंद्र कोली का शव लेने पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने दावा किया कि घटना आत्महत्या की नहीं लगती। उन्होंने सात फीट के खोखे में रस्सी से फंदा लगाने और रस्सी में दो गांठ होने को लेकर सवाल उठाए। उनका आशंका है कि सुरेंद्र की हत्या के बाद शव को फंदे पर लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप दिया गया हो सकता है। हालांकि, ये परिजनों की आशंकाएं और आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रस्सी और खोखे को लेकर उठाए सवाल
नारायण सिंह रावत ने कहा कि करीब सात फीट के खोखे में आत्महत्या करना संभव नहीं लगता। उन्होंने दावा किया कि सुरेंद्र के गले में कसी हुई रस्सी की डबल गांठ थी। उन्होंने नाक और मुंह से खून आने तथा खोखे का शटर खुला होने का भी जिक्र किया और इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर घटना को संदिग्ध बताया।
रावत ने स्थानीय स्तर पर साजिश की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना को निठारी कांड से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सुरेंद्र के भाइयों और बेटे ने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया।
20 साल तक कानूनी लड़ाई का किया जिक्र
नारायण सिंह रावत ने कहा कि सुरेंद्र कोली ने करीब 20 साल तक खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। उनके मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में 12 मामलों में उसे बरी किया था और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी उसे बरी कर दिया था।
उन्होंने सुरेंद्र की मौत के बाद परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का भी जिक्र किया और परिवार के लिए सहायता की जरूरत बताई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर
सुरेंद्र कोली के शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। नाक से खून आने के मामले में भी डॉक्टर अपनी रिपोर्ट देंगे। सुरेंद्र के कपड़ों को सील कर दिया गया है।
पोस्टमार्टम के बाद शव उसके बेटे, तीन भाइयों और परिचित पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को सौंप दिया गया। इसके बाद हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अब मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।





