जुलाई-अगस्त की सुस्ती के बाद महंगा हुआ सीमेंट, सितंबर में बढ़े 7 रुपये; अक्तूबर में भी बढ़ सकते हैं भाव

जुलाई और अगस्त में मांग सुस्त रहने के बाद सितंबर में सीमेंट की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। सेंट्रम ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में देशभर में सीमेंट की औसत खुदरा कीमत 7 रुपये प्रति 50 किलो बोरी बढ़कर 356 रुपये हो गई। निर्माण गतिविधियों में सुधार और लागत बढ़ने के बीच कंपनियां अक्तूबर में भी कीमतों में बढ़ोतरी की कोशिश कर सकती हैं।
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा बढ़े दाम
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में दक्षिण भारत में सीमेंट की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई। यहां औसतन 11 रुपये प्रति बोरी का इजाफा दर्ज किया गया। पश्चिम भारत में कीमतें औसतन 9 रुपये प्रति बोरी बढ़ीं।
वहीं, उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में सीमेंट की कीमतों में औसतन 5-5 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड और नॉन-ट्रेड दोनों सेगमेंट में कीमतें बढ़ीं, हालांकि ज्यादातर बाजारों में नॉन-ट्रेड सीमेंट के दामों में ज्यादा तेजी देखने को मिली।
दूसरी तिमाही में औसत कीमत रही कम
जुलाई और अगस्त में कीमतों में आई कमजोरी का असर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के औसत भाव पर भी पड़ा। इस दौरान देशभर में सीमेंट का औसत ट्रेड मूल्य 351 रुपये प्रति बोरी रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में करीब एक रुपये कम है।
हालांकि, सितंबर में निर्माण गतिविधियों में सुधार के साथ कीमतों में फिर तेजी आई है। मानसून के दौरान निर्माण कार्यों में आई सुस्ती के बाद कई बाजारों में सितंबर के अंत तक मांग में सुधार देखने को मिला।
अक्तूबर में 5 से 20 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम
सेंट्रम ब्रोकिंग की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि सीमेंट कंपनियां अक्तूबर में कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का प्रयास कर सकती हैं। अलग-अलग बाजारों में 5 से 20 रुपये प्रति बोरी तक कीमत बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि, बढ़ी हुई कीमतें बाजार में कितनी टिकेंगी, यह मांग की स्थिति और डीलरों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। कुछ बाजारों में कंपनियों की ओर से बिलिंग रेट बढ़ाए जाने के बावजूद डीलरों ने अपने तिमाही बिक्री लक्ष्य पूरे करने के लिए पुराने दामों पर ही स्टॉक बेचा।
ईंधन महंगा होने से कंपनियों पर लागत का दबाव
हाल के हफ्तों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से सीमेंट कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ा है। कंपनियां इसी लागत दबाव को कम करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी की कोशिश कर रही हैं।
दूसरी ओर, सितंबर के अंत तक निर्माण गतिविधियों में सुधार से सीमेंट की मांग को भी सहारा मिला है। अगर मांग में सुधार जारी रहता है और डीलरों की ओर से बढ़े हुए दाम स्वीकार किए जाते हैं, तो आने वाले दिनों में कीमतों का असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
घर बनाने वालों की बढ़ सकती है लागत
सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर निर्माण लागत पर पड़ता है। ऐसे में घर बनाने या निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए आने वाले दिनों में सीमेंट के दाम महत्वपूर्ण रहेंगे। अक्तूबर में कंपनियों की प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होती है या नहीं, यह बाजार की मांग और डीलरों की प्रतिक्रिया से तय होगा।





