सौरभ हत्याकांड में आज फैसला, कोर्ट में मुस्कान-साहिल से पूछा गया- ‘बेटे को क्यों मारा?’

देशभर में चर्चा में रहे सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को जिला न्यायालय फैसला सुना सकता है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मामले में निर्णय के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अब सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
मामले में सौरभ के भाई बबलू और मां रेनू देवी समेत कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। परिजनों के अनुसार, बबलू ने अदालत में 11 बार और रेनू देवी ने नौ बार बयान दर्ज कराए। गवाही के दौरान बचाव पक्ष की ओर से उनसे लंबी जिरह भी की गई।
परिजनों ने जताया आरोपियों के व्यवहार पर सवाल
सौरभ के परिजनों का कहना है कि अदालत में पेशी के दौरान आरोपी मुस्कान रस्तौगी और साहिल शुक्ला के चेहरे पर किसी तरह की चिंता या पछतावा नजर नहीं आया। हालांकि, यह परिजनों का दावा है और आरोपियों की मनःस्थिति के बारे में इससे स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
परिजनों का कहना है कि अगर अदालत दोनों को सजा सुनाती है तो वे उन्हें अलग-अलग जिलों की जेलों में रखने की मांग करेंगे। भाई बबलू के मुताबिक, अप्रैल में हुई पेशी के दौरान भी दोनों आरोपियों के व्यवहार को देखकर उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वे किसी गंभीर मामले में जेल में बंद हैं।
मां ने कहा- बेटे को क्यों मारा?
सौरभ की मां रेनू देवी ने भावुक होते हुए सवाल उठाया कि उनके बेटे की हत्या करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी। उनका कहना है कि सौरभ के विदेश में रहने के दौरान भी परिवार आरोपी साहिल को जानता था और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद की जाती थी।
परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से मुस्कान का परिवार के साथ व्यवहार ठीक नहीं था। उनका यह भी दावा है कि बाद में वह अलग किराये के मकान में रहने लगी थी।
11 बार बबलू और 9 बार रेनू ने दिए बयान
मामले की सुनवाई के दौरान सौरभ के भाई बबलू ने 11 बार अदालत में बयान दर्ज कराए, जबकि उनकी मां रेनू देवी नौ बार न्यायालय पहुंचीं। दोनों से बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी जिरह की।
परिजनों ने यह भी बताया कि सौरभ की हत्या के बाद उनके कपड़ों को लेकर भी परिवार भावुक स्थिति में है। उनका कहना है कि जिस कमरे में सौरभ किराये पर रहता था, उसे पुलिस ने सील कर दिया था और वहां उसके कपड़े मौजूद थे। परिजनों के मुताबिक, वे अब तक सौरभ के कपड़ों का विसर्जन नहीं कर पाए हैं।
18 मार्च 2025 को सामने आया था मामला
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत के लापता होने के बाद उनके भाई बबलू ने 18 मार्च 2025 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सौरभ के लापता होने की जानकारी दी गई थी और उनकी पत्नी मुस्कान रस्तौगी तथा साहिल शुक्ला पर संदेह जताया गया था।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 की रात की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि वारदात के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े किए गए और उन्हें एक ड्रम में रखा गया।
पुलिस के अनुसार, मुस्कान और साहिल 5 मार्च को शिमला-मनाली गए थे और 17 मार्च को मेरठ लौटे। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और पुलिस ने ड्रम से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए।
22 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के साथ-साथ अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसले की तारीख तय की।
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे के मुताबिक, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए बुधवार की तारीख निर्धारित की है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही पेशी
मामले में दोनों आरोपियों की सुरक्षा को देखते हुए बाद की पेशियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाती रही हैं। इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को दोनों को अदालत में पेश किया गया था।
अब 30 सितंबर को आने वाले संभावित फैसले पर सौरभ के परिवार के साथ-साथ इस चर्चित मामले में नजर बनाए लोगों की निगाहें टिकी हैं। अदालत का फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ क्या निर्णय दिया जाता है।





