राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय की डायरी में क्या-क्या दर्ज? नृपेंद्र मिश्र ने उठाया था सवाल

राम मंदिर के चढ़ावे की रकम चोरी के मामले में शुरुआत में एफआईआर नहीं कराने को लेकर चंपत राय की डायरी में घटनाक्रम दर्ज है। डायरी के अनुसार, नृपेंद्र मिश्र ने पूछा था कि अब तक पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। बाद में मामले में पुलिस की मदद ली गई और एक आरोपी को नेपाल से हिरासत में लिया गया।

एफआईआर को लेकर नृपेंद्र मिश्र ने पूछा था सवाल

राम मंदिर के चढ़ावे की रकम चोरी के मामले में शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे जांच लंबी चलने की आशंका के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव पर संभावित असर की चिंता का भी जिक्र चंपत राय की डायरी में किया गया है।

डायरी के मुताबिक, आठ जून को अयोध्या पहुंचे मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अनूप मित्तल को चंपत राय ने चार जून से सामने आए घटनाक्रम की जानकारी दी। बैठक में डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी मौजूद थे।

इसी दौरान नृपेंद्र मिश्र ने सवाल किया कि मामले में अब तक पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। चंपत राय ने जवाब दिया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला पूरी तरह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में चला जाता और जांच कितने समय तक चलेगी, यह स्पष्ट नहीं होता।

डायरी में यह भी दर्ज है कि इस दौरान चोरी की रकम का बड़ा हिस्सा खुर्द-बुर्द किए जाने की आशंका थी।

चुनाव पर असर की भी जताई गई थी चिंता

डायरी में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, यह चिंता भी सामने आई कि मामला लंबे समय तक चलने और लगातार मीडिया में बने रहने से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

डायरी के मुताबिक, चुनाव पर संभावित असर की बात सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

लखनऊ की बैठक में भी उठा एफआईआर का मुद्दा

11 जून को लखनऊ में हुई बैठक में भी चार जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। बैठक में डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, भैयाजी जोशी, स्वामी गोविंद देव गिरि, नृपेंद्र मिश्र और कृष्ण मोहन समेत अन्य लोग मौजूद थे।

डायरी के अनुसार, इस बैठक में भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की गई और एफआईआर नहीं कराने को लेकर सवाल उठाया गया।

बाद में पुलिस की ली गई मदद

डायरी में दर्ज जानकारी के अनुसार, बाद के चरण में पुलिस की सहायता ली गई और उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। पुलिस ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।

इसी दौरान चोरी करने वाले एक युवक के नेपाल सीमा की ओर जाने की सूचना सामने आई। डायरी के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 24 घंटे के भीतर उस युवक को नेपाल से हिरासत में लिया। उसके कब्जे से चोरी की रकम भी बरामद की गई।

इस घटनाक्रम के अनुसार, शुरुआत में एफआईआर नहीं कराने का फैसला केवल पुलिस जांच और चोरी की रकम की बरामदगी से जुड़ी चिंताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि मामले के सार्वजनिक होने और चुनाव पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

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