यूपी में डामर हुआ महंगा, 52 हजार से एक लाख रुपये टन तक पहुंचा भाव; सड़क परियोजनाएं प्रभावित

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण परियोजनाओं पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन (डामर) की कीमत कुछ ही महीनों में करीब दोगुनी हो गई है। कीमत बढ़ने के साथ इसकी आपूर्ति में भी कमी आई है। इसके चलते प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत प्रदेश में करीब 68 सड़कों का लगभग 650 किलोमीटर निर्माण प्रभावित हुआ है।

सड़क निर्माण कंपनी एआर थर्मोस्टेट्स के निदेशक सिद्धार्थ गुप्ता के अनुसार, फरवरी 2026 में बिटुमिन की कीमत करीब 52 हजार रुपये प्रति टन थी। जून तक इसकी कीमत बढ़कर लगभग एक लाख रुपये प्रति टन हो गई। कीमत में बढ़ोतरी के साथ आपूर्ति संकट भी गहरा गया है।

तेल कंपनियों से आपूर्ति में कमी

निर्माण कंपनियों के मुताबिक, तेल कंपनियों से बिटुमिन की आपूर्ति करीब आधी रह गई है। कई राज्यों में अधिक कीमत देने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में बिटुमिन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे सड़क निर्माण परियोजनाओं की लागत और काम पूरा करने की समयसीमा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

भारत में बिटुमिन की कुल जरूरत का करीब 30 से 40 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा होता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद आयात प्रभावित होने से घरेलू बाजार में भी इसकी उपलब्धता पर असर पड़ा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश में 2.36 लाख टन बिटुमिन का आयात हुआ था।

पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं को मिली राहत

बिटुमिन की कीमत में अचानक हुई बढ़ोतरी के बीच केंद्र ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए मूल्य समायोजन की व्यवस्था की है। उत्तर प्रदेश में भी मई में उन पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं की बढ़ी हुई बिटुमिन लागत वहन करने का फैसला लिया गया, जिनकी निविदा एक अप्रैल से पहले हुई थी और जिनमें कीमत बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान नहीं था।

इसके बाद पीडब्ल्यूडी की कुछ रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू किया जा सका। हालांकि, ग्रामीण सड़कों के निर्माण से जुड़े ठेकेदारों को अभी इसी तरह की राहत का इंतजार है।

पीएमजीएसवाई की सड़कों पर ज्यादा असर

ग्रामीण सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों का कहना है कि पीएमजीएसवाई के ठेके कम लागत, निश्चित दर और सीमित मार्जिन वाले होते हैं। ऐसे में बिटुमिन की कीमत करीब दोगुनी होने से अतिरिक्त खर्च सीधे उनकी कार्यशील पूंजी पर पड़ रहा है।

ठेकेदारों ने सरकार से पीडब्ल्यूडी की तरह बिटुमिन की कीमत में बढ़ोतरी के अंतर का भुगतान करने, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और आपूर्ति संकट के कारण हुई देरी पर बिना जुर्माने के समय विस्तार देने की मांग की है।

छोटे ठेकेदारों पर बढ़ा दबाव

ठेकेदारों का दावा है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो बढ़ी हुई लागत का असर छोटे निर्माण ठेकेदारों पर पड़ेगा और कई ठेकेदार ग्रामीण सड़क निर्माण के काम से बाहर हो सकते हैं। इससे पीएमजीएसवाई के तहत प्रस्तावित और निर्माणाधीन सड़कों की गति और प्रभावित होने की आशंका है।

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