भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील लागू: क्या सस्ता होगा, किसे मिलेगा फायदा और कितना है दोनों देशों का कारोबार?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने, भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने और निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारतीय उत्पादों के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया है। वहीं, भारत भी न्यूजीलैंड से आने वाले कई उत्पादों पर शुल्क में कटौती करेगा।

दोनों देशों के बीच इस समझौते पर बातचीत लंबे समय से चल रही थी। औपचारिक वार्ता मार्च 2025 में शुरू हुई थी। अब इसके लागू होने से कारोबार, सेवाओं, निवेश और कुशल पेशेवरों की आवाजाही को लेकर नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच कितना है व्यापार?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 में दोनों देशों के बीच करीब 86.7 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ था। इसके बाद कोरोना महामारी के प्रभाव से व्यापार में गिरावट आई, लेकिन 2022-23 में यह फिर एक अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया।

वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार अपने उच्च स्तर पर पहुंचा। हालांकि, 2024-25 और 2025-26 के दौरान इसमें गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में भारत का निर्यात घटा, जबकि न्यूजीलैंड से आयात बढ़ा।

भारतीय कारोबारियों को क्या होगा फायदा?

इस समझौते से कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच: समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया है। इससे भारतीय उत्पादों की कीमतों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है और निर्यातकों को नए ग्राहक हासिल करने में मदद मिल सकती है।

सेवा क्षेत्र को बढ़ावा: सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-सक्षम सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन, निर्माण और पेशेवर सेवाओं के लिए भी नए अवसर खुलने की संभावना है।

भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

समझौते में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत एक समय में 5,000 पेशेवरों का कोटा तय किया गया है और पात्र लोगों को तीन साल तक न्यूजीलैंड में रहने का अवसर मिल सकता है। आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों के पेशेवरों के साथ आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षकों को भी अवसर मिल सकते हैं।

छात्रों के लिए भी समझौते में प्रावधान किए गए हैं। न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने के अवसरों के लिए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा, डॉक्टरेट धारकों को चार साल तक और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (STEM) के स्नातक तथा स्नातकोत्तर छात्रों को तीन साल तक वहां रहकर काम करने के अवसर देने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

भारत में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता

न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इससे विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, सेवाओं, नवाचार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

समझौते के तहत भारत की दवा और चिकित्सा उपकरण कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद मिल सकती है। नियामकीय प्रक्रियाओं में अनावश्यक निरीक्षण कम होने से कारोबार आसान होने की संभावना है।

न्यूजीलैंड को भारत से क्या मिलेगा?

भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए अहम अवसर प्रदान करता है। समझौते के तहत भारत की ओर से न्यूजीलैंड के करीब 95 प्रतिशत मौजूदा निर्यातों पर शुल्क खत्म करने या उसमें भारी कटौती करने का प्रावधान है। इनमें से लगभग 57 प्रतिशत निर्यातों को समझौता लागू होने के पहले दिन से शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की बात कही गई है। समझौता पूरी तरह लागू होने पर न्यूजीलैंड के 82 प्रतिशत निर्यातों पर भारत में आयात शुल्क नहीं लगेगा।

न्यूजीलैंड के कीवीफ्रूट पर शुल्क आधा करने और सेब पर भी 50 प्रतिशत कटौती का प्रावधान है। चेरी, एवोकाडो, पर्सिमन्स और ब्लूबेरी जैसे उत्पादों को 10 वर्षों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की बात कही गई है। भेड़ के मांस, ऊन और लकड़ी से जुड़े कई उत्पादों पर भी शुल्क समाप्त करने का प्रावधान है।

डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों पर भारत का रुख

भारत ने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों की सुरक्षा के लिए डेयरी उत्पादों और कई संवेदनशील कृषि वस्तुओं को बाजार पहुंच से बाहर रखा है। इनमें दूध, पनीर, कॉफी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे उत्पाद शामिल हैं।

डेयरी क्षेत्र भारत के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इससे करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसलिए इस क्षेत्र को समझौते से बाहर रखना भारत की प्रमुख शर्तों में शामिल रहा।

भारत ने किन देशों के साथ किए हैं व्यापार समझौते?

भारत ने ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। भारत ने आसियान देशों तथा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों के साथ भी समझौते किए हैं। इसके अलावा, कई अन्य व्यापारिक साझेदारों के साथ नए समझौतों पर बातचीत जारी रही है।

क्या बदलेगा आम कारोबार और उपभोक्ताओं के लिए?

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से भारतीय निर्यातकों को शुल्क-मुक्त पहुंच, सेवा क्षेत्र को नए अवसर और पेशेवरों को रोजगार के रास्ते मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों का भारत में आयात शुल्क घटने से उनके कारोबारियों को लाभ मिल सकता है। हालांकि, समझौते का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नए अवसरों का कितना फायदा उठा पाती हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार आने वाले वर्षों में किस गति से बढ़ता है।

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