देश के सबसे बड़े IPO पर नजरें, 21 अक्टूबर से निवेश का मौका; जियो जुटाएगी ₹30 हजार करोड़

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने आईपीओ को लेकर अंतिम रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का यह आईपीओ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक खुला रहेगा। इसके जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित निर्गम के आकार को देखते हुए इसे भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक माना जा रहा है।
21 अक्टूबर से निवेश का मौका
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को खुलेगा और शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगाई जाएगी। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।
कंपनी इस आईपीओ के तहत 27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करेगी। प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये रखा गया है। यह पूरी तरह से नए शेयरों का निर्गम है, इसलिए आईपीओ से जुटाई गई राशि सीधे कंपनी को मिलेगी।
कर्मचारियों और रिलायंस शेयरधारकों के लिए भी हिस्सा आरक्षित
आईपीओ में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक का हिस्सा आरक्षित किया गया है। वहीं, पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक का हिस्सा रखा गया है। इस श्रेणी में वे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर 2026 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर थे।
कंपनी आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कुछ कर्जों के पूर्व भुगतान और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।
जियो के राजस्व और मुनाफे में बढ़ोतरी
जियो प्लेटफॉर्म्स के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़त दर्ज की गई है। मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व 14.6 प्रतिशत बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1,28,218 करोड़ रुपये था।
इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 15.1 प्रतिशत बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 26,109 करोड़ रुपये था। कंपनी का एबिटा भी 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये रहा। एबिटा मार्जिन 51.91 प्रतिशत दर्ज किया गया।
52 करोड़ से ज्यादा ग्राहक, ARPU 214 रुपये
मार्च 2026 की तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स के ग्राहकों की संख्या 52.4 करोड़ से अधिक थी। इस दौरान प्रति यूजर औसत राजस्व यानी ARPU 214 रुपये रहा। कंपनी का कुल कर्ज 3.1 प्रतिशत घटकर 70,781 करोड़ रुपये पर आ गया।
हालांकि, कंपनी के कारोबार में प्रवर्तक समूह पर निर्भरता एक अहम पहलू है। वित्त वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स के समेकित परिचालन राजस्व का 77.08 प्रतिशत हिस्सा प्रीपेड सेवाओं से आया। रिलायंस रिटेल, जियो की प्रीपेड सेवाओं का एकमात्र वितरक है।
रिलायंस के पास 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी
आईपीओ से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वहीं, मेटा और गूगल की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 17.7 प्रतिशत बताई गई है। इस निर्गम के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, बोफा सिक्योरिटीज, गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन सहित 19 बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किए गए हैं। केफिन टेक्नोलॉजीज इस आईपीओ का रजिस्ट्रार है।
जियो का यह प्रस्तावित आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, निवेश से पहले निवेशकों को आईपीओ का प्राइस बैंड, न्यूनतम निवेश राशि और अन्य शर्तों की आधिकारिक जानकारी जरूर देखनी चाहिए।





