भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक पहचान, दुनिया के सबसे असरदार सुधारों में मिली जगह

भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का डिजिटल ढांचा दुनिया के 10 सबसे प्रभावशाली संरचनात्मक सुधारों में शामिल हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान, आधार और तकनीक आधारित सेवाओं के विस्तार ने देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। साथ ही, इससे लेनदेन की लागत कम करने और कारोबार को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद मिली है।
38 देशों के 43 सुधारों का विश्लेषण
केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में 38 देशों के 43 प्रमुख संरचनात्मक सुधारों का विश्लेषण किया। इसमें भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को एक प्रभावशाली सुधार के रूप में रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल ढांचे ने आम लोगों के लिए वित्तीय और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस व्यवस्था की सफलता में सरकार, बैंकों, वित्तीय नियामकों, भुगतान नेटवर्क और फिनटेक कंपनियों के बीच समन्वय का अहम योगदान रहा है। अलग-अलग डिजिटल प्रणालियों के आपस में काम करने की क्षमता ने भी इस ढांचे को मजबूत बनाया है।
यूपीआई से डिजिटल भुगतान को मिली गति
भारत में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) डिजिटल लेनदेन का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई नेटवर्क हर महीने 13 अरब से अधिक लेनदेन संसाधित करता है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल से ग्राहकों और कारोबारियों के लिए लेनदेन करना अधिक सुविधाजनक हुआ है।
डिजिटल भुगतान के विस्तार ने नकद लेनदेन पर निर्भरता कम करने और आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने में भी मदद की है।
आधार से बड़ी आबादी को मिला डिजिटल पहचान का आधार
रिपोर्ट में आधार प्रणाली के व्यापक दायरे का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, आधार के तहत देश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी को कवर किया गया है। डिजिटल पहचान की इस व्यवस्था ने विभिन्न सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में योगदान दिया है।
आधार और यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के प्रमुख हिस्से हैं। इनके माध्यम से पहचान, भुगतान और सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
एमएसएमई के कारोबार में बढ़ा डिजिटल लेनदेन
डिजिटल क्रांति का असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र के कुल लेनदेन में डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
डिजिटल भुगतान अपनाने से छोटे कारोबारियों को लेनदेन में सुविधा मिलती है। इसके साथ ही कारोबार का रिकॉर्ड रखने और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
भविष्य में इन चुनौतियों पर देना होगा ध्यान
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल ढांचे की सफलता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए निरंतर सुधार जरूरी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों, जलवायु जोखिमों, महत्वपूर्ण तकनीकों और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, टिकाऊ नतीजों के लिए स्पष्ट नीतियां, सुधारों का सही क्रम, राजनीतिक प्रतिबद्धता और नीतिगत स्थिरता महत्वपूर्ण हैं। यानी केवल सुधारों की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना और समय के साथ बेहतर बनाना भी जरूरी है।





