निजी स्कूलों के शिक्षकों को राहत की उम्मीद? राष्ट्रीय नीति की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कही बड़ी बात

निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में कहा गया है कि देशभर के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की कोई व्यापक एवं एकसमान राष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है। याचिकाकर्ता ने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए एक समान नीति और संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग की है।
राष्ट्रीय बोर्ड बनाने की मांग
याचिका में केंद्र सरकार से ‘राष्ट्रीय प्राइवेट स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड’ या इसी तरह का कोई संस्थागत तंत्र बनाने पर विचार करने की मांग की गई है। इसके अलावा निजी स्कूल शिक्षकों के लिए पेंशन, प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी जैसे लाभों को एक समान तरीके से लागू करने और उनकी निगरानी की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
शिक्षकों की शिकायतों के प्रभावी समाधान के लिए भी एक अलग व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था अलग-अलग राज्यों के कानूनों, संस्थानों की नीतियों और नियुक्ति अनुबंधों पर निर्भर करती है, जिससे समान काम करने वाले शिक्षकों को मिलने वाले लाभों में अंतर पैदा होता है।
देश में 37 लाख से ज्यादा निजी स्कूल शिक्षक
याचिका में शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 37,30,047 शिक्षक काम कर रहे हैं। याचिका के मुताबिक ये देश के कुल शिक्षकों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक शैक्षिक सेवाएं देने के बावजूद बड़ी संख्या में निजी स्कूल शिक्षक पर्याप्त पेंशन, व्यापक चिकित्सा सहायता और सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।
चार हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केरल की याचिकाकर्ता लिजिमोल जॉर्ज की याचिका पर अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है। अब केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई होगी।





