दुर्गा पूजा स्पेशल: लखनऊ में कहां सजे हैं सबसे खास पंडाल? भव्य सजावट से लेकर अनूठी थीम तक, जानें सबकुछ

दुर्गा पूजा 2026 के अवसर पर राजधानी लखनऊ में मां दुर्गा के स्वागत के लिए आकर्षक पंडाल सजाए गए हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में धार्मिक आस्था, बंगाली संस्कृति और कलात्मक सजावट का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। कहीं अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है, तो कहीं गोल्डन सजावट और पारंपरिक बंगाली शैली लोगों का ध्यान खींच रही है।

अगर आप परिवार और दोस्तों के साथ दुर्गा पूजा के पंडाल देखने की योजना बना रहे हैं, तो जानकीपुरम, अमीनाबाद, सुशांत गोल्फ सिटी और विकास नगर के प्रमुख पूजा स्थलों पर जा सकते हैं।

जानकीपुरम में राम मंदिर थीम वाला पंडाल

जानकीपुरम स्थित दुर्गा पार्क का पंडाल इस साल खास आकर्षण बना हुआ है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसे अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में पंडाल की ऊंचाई करीब 110 फीट और मां दुर्गा की प्रतिमा की ऊंचाई 18 फीट बताई गई है। यहां इको-फ्रेंडली प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र है।

अमीनाबाद में गोल्डन सजावट वाला पंडाल

अमीनाबाद के घस्यारी मंडी स्थित मॉडल हाउस पार्क में दुर्गा पूजा पंडाल सजाया गया है। यहां गोल्डन टच वाली भव्य सजावट पंडाल की खूबसूरती बढ़ा रही है। पूजा-अर्चना और उत्सवी माहौल के बीच यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

सुशांत गोल्फ सिटी में भव्य गोल्डन पंडाल

सुल्तानपुर रोड स्थित अमर शहीद पथ के पास सुशांत गोल्फ सिटी में विंट क्लब लॉन में भी दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया है। यहां गोल्डन थीम पर तैयार किया गया पंडाल और इसका भव्य मुख्य द्वार लोगों का ध्यान खींच रहा है।

विकास नगर में शाश्वत दुर्गा पूजा पंडाल

विकास नगर के सेक्टर-8 में चर्च रोड स्थित शाश्वत दुर्गा पूजा पार्क में मां महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां पारंपरिक बंगाली संस्कृति, कलात्मक सजावट और धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। शाम के समय रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव के माहौल को और खास बनाते हैं।

धार्मिक आस्था और संस्कृति का संगम

लखनऊ में दुर्गा पूजा के दौरान सजे ये पंडाल धार्मिक आस्था के साथ कला और संस्कृति को भी प्रदर्शित करते हैं। अलग-अलग थीम और आकर्षक सजावट के कारण ये पूजा स्थल लोगों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। हालांकि, पंडालों की सजावट, कार्यक्रमों और दर्शन के समय में बदलाव संभव है। ऐसे में जाने से पहले संबंधित पूजा समिति से जानकारी प्राप्त करना बेहतर रहेगा।

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