गेहूं हुआ महंगा, कीमतों में 5% से अधिक की तेजी; सरकारी भंडार बढ़ने के बावजूद क्यों नहीं मिली राहत?

देश में गेहूं की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। निर्यात पर लगी रोक हटने के बाद करीब डेढ़ महीने में दिल्ली में गेहूं के दाम 5.24 फीसदी बढ़ गए हैं। इसका असर आने वाले दिनों में आटा, मैदा, सूजी और ब्रेड-बिस्कुट जैसे उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। खास बात यह है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं।

डेढ़ महीने में 150 रुपये से ज्यादा बढ़े दाम

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को गेहूं और इसके उत्पादों, जैसे आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर चार साल से जारी प्रतिबंध हटा दिया था। इसके बाद घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी आई है।

24 अगस्त को दिल्ली में गेहूं का भाव 2,879 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 14 अक्तूबर तक बढ़कर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस तरह कीमत में 151 रुपये प्रति क्विंटल यानी 5.24 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

अन्य मंडियों में भी कीमतें बढ़ी हैं। राजकोट में गेहूं का भाव 2,700 रुपये से बढ़कर 2,875 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। वहीं, इंदौर में कीमत 2,725 रुपये से बढ़कर 2,812 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई।

पांच साल के उच्चतम स्तर पर सरकारी स्टॉक

गेहूं की कीमतों में तेजी के बीच सरकारी भंडार की स्थिति मजबूत बनी हुई है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, एक सितंबर 2026 तक देश में गेहूं का सरकारी स्टॉक 479 लाख टन था। यह पिछले पांच वर्षों में इस अवधि का सबसे ऊंचा स्तर है।

पिछले साल एक सितंबर को सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 332.97 लाख टन था। इस लिहाज से इस साल स्टॉक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पर्याप्त भंडार होने के बावजूद बाजार में कीमतों का बढ़ना चिंता का विषय है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं गेहूं के भाव?

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, गेहूं की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं।

1. निर्यात प्रतिबंध हटने का असर: गेहूं और उसके उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने से घरेलू बाजार में मांग और कीमतों को समर्थन मिल रहा है।

2. वैश्विक बाजार में तेजी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच रही हैं। इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।

3. मौसम और अल-नीनो की चिंता: आगामी रबी सीजन में मौसम की अनिश्चितता और अल-नीनो की आशंका के कारण गेहूं की बुआई में देरी या उत्पादन प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। इससे बाजार में गेहूं के स्टॉक को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

4. त्योहारों और शादियों के सीजन की मांग: त्योहारों के साथ आने वाले शादी के सीजन को देखते हुए उपभोक्ता मांग और आटा मिलों की खरीदारी बढ़ रही है। इससे भी कीमतों को सहारा मिल रहा है।

आटा, मैदा और ब्रेड-बिस्कुट हो सकते हैं महंगे

गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर खुदरा बाजार में देखने को मिल सकता है। आटा, मैदा और सूजी के अलावा ब्रेड तथा बिस्कुट जैसे बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ने की आशंका है। यदि कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार के पास गेहूं का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यदि बाजार में कीमतें और बढ़ती हैं, तो सरकार खुले बाजार में अतिरिक्त गेहूं बेचकर आपूर्ति बढ़ाने और दाम नियंत्रित करने के लिए कदम उठा सकती है।

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