आकाश की सियासी राह में अशोक सिद्धार्थ क्यों बने रोड़ा? मायावती के एक्शन से समझें पूरी कहानी

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में आकाश आनंद को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने 10 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया। यह पिछले करीब तीन वर्षों में उनके खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले भी उन्हें पार्टी के अहम पदों से हटाया जा चुका है।

आकाश आनंद मायावती के भतीजे हैं। मायावती ने उन्हें 2023 में अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन इसके बाद पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई बार बदलाव हुए। इस पूरे घटनाक्रम में आकाश के ससुर और बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की भूमिका भी चर्चा में रही है।

आकाश आनंद पर कब-कब हुई कार्रवाई?
पहली बार: 2024 में पदों से हटाया

मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सीतापुर की एक रैली में आकाश आनंद के आक्रामक भाषण को लेकर मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी पद से हटा दिया था। हालांकि, करीब 47 दिन बाद 23 जून 2024 को उन्हें दोबारा इन जिम्मेदारियों पर बहाल कर दिया गया।

दूसरी बार: 2025 में पार्टी से निष्कासन

मार्च 2025 में मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर काम कर रहे हैं। दोनों पर पार्टी में गुटबाजी बढ़ाने और संगठन से जुड़े मामलों में दखल देने के आरोप लगाए गए थे।

बाद में अप्रैल 2025 में आकाश ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इसके बाद उन्हें पार्टी में वापस लिया गया और अगस्त 2025 में मुख्य राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई।

तीसरी बार: सितंबर 2026 में पद से हटाया

अगस्त 2026 में नोएडा की एक रैली में आकाश आनंद ने संगठन में गलत लोगों के गलत जगहों पर होने की बात कही थी। इसे बसपा नेतृत्व के खिलाफ अनुशासनहीनता के तौर पर देखा गया। इसके बाद सितंबर में हुई पार्टी की राष्ट्रीय बैठक से उन्हें दूर रखा गया और उन्हें मुख्य राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया गया।

अब पार्टी से पूरी तरह बाहर

10 सितंबर 2026 को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी मुक्त कर दिया। मायावती ने उनकी वापसी के लिए उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की शर्त रखी थी। अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास का एलान कर दिया, लेकिन मायावती ने इसके बावजूद आकाश को पार्टी से बाहर करने का फैसला किया।

कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?

अशोक सिद्धार्थ बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद और आकाश आनंद के ससुर हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के रहने वाले हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी की थी। बाद में वे बसपा से जुड़े और पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

बसपा में उनकी भूमिका बढ़ने के साथ उन्हें तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों का संगठन प्रभारी बनाया गया था।

आकाश से कैसे जुड़ा पारिवारिक रिश्ता?

मार्च 2023 में अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी आकाश आनंद से हुई। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ का मायावती के परिवार से सीधा रिश्ता जुड़ गया। याचिका और पार्टी के भीतर की घटनाओं के संदर्भ में यह आरोप भी सामने आया कि पारिवारिक रिश्ते के बाद संगठन में उनका प्रभाव बढ़ा।

समानांतर पावर सेंटर का आरोप

मायावती के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी में गुटबाजी बढ़ाने और आकाश आनंद के राजनीतिक करियर को प्रभावित करने के आरोप लगे थे। उन पर दिल्ली और हरियाणा चुनाव में संगठनात्मक फैसलों और टिकट वितरण में मनमानी करने तथा पार्टी फंड से जुड़े मामलों में दखल देने के आरोप भी लगाए गए। इन्हीं विवादों के बीच उन पर बसपा में एक ‘समानांतर पावर सेंटर’ खड़ा करने की कोशिश का आरोप लगा।

अशोक सिद्धार्थ को फरवरी 2025 में पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, सितंबर 2025 में सोशल मीडिया पर माफी मांगने के बाद उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया।

इसके बाद अगस्त 2026 में उन्हें दोबारा पार्टी से बाहर किया गया। मायावती ने उन पर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने और संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाने के आरोप लगाए। अब सितंबर 2026 में आकाश आनंद की वापसी के लिए अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की शर्त रखी गई, जिसे उन्होंने मान लिया। इसके बावजूद आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ के बीच पारिवारिक रिश्ता बसपा की आंतरिक राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि, पार्टी के भीतर के आरोपों और मायावती के फैसलों को उनके पक्षों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

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