मिर्जापुर फिल्म रिव्यू: स्वैग, एक्शन और ट्विस्ट से भरपूर कहानी, मुन्ना का अंदाज बरकरार; तीन घंटे की फिल्म पर राय

मिर्जापुर की गद्दी की जंग अब ओटीटी से निकलकर बड़े पर्दे तक पहुंच गई है। अली फजल, पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु स्टारर ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। तीन सीजन तक वेब सीरीज में दर्शकों का मनोरंजन करने वाली इस कहानी को अब करीब तीन घंटे की फिल्म के रूप में पेश किया गया है। सवाल है कि क्या बड़े पर्दे पर भी ‘मिर्जापुर’ का वही भौकाल और रोमांच देखने को मिलता है?
रेटिंग: 3/5
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी का आधार मिर्जापुर की गद्दी और उस पर कब्जे की जंग ही है। इस बार बब्बन बबुआ के किरदार में रवि किशन विलेन की भूमिका में नजर आते हैं। उसका मकसद कालीन भैया और उनके बेटे मुन्ना को रास्ते से हटाकर मिर्जापुर की गद्दी पर कब्जा करना है।
- बब्बन को कालीन भैया तक प
- हुंचने में सीएम के छोटे भाई जेपी यादव और जरीना मदद करते हैं। वहीं, बब्बन की प्रेमिका मुमताज बीबी और उसका वफादार बिरजू लोहार भी कहानी का हिस्सा हैं। बब्बन अपने प्लान के तहत कालीन भैया को मिर्जापुर से बाहर निकालकर खत्म करना चाहता है। वह अपने मकसद में कामयाब होता है या नहीं, यही फिल्म की मुख्य कहानी है।
रवि किशन का अभिनय बना सरप्राइज
अभिनय की बात करें तो रवि किशन फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज पैकेज नजर आते हैं। उन्हें फिल्म में पर्याप्त स्क्रीन टाइम मिला है और उन्होंने बब्बन बबुआ के किरदार को प्रभावी ढंग से निभाया है। एक्शन हो या इमोशनल सीन, रवि किशन अपने अभिनय से प्रभावित करते हैं।
पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के किरदार में अपना दबदबा कायम रखते हैं। वहीं दिव्येंदु को मुन्ना के अंदाज में देखना फैंस के लिए खास अनुभव है। जीतेंद्र भी बबलू के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी समेत अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
निर्देशन में रह गई कमी
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका निर्देशन और कहानी की प्रस्तुति है। गुरमीत सिंह ने वेब सीरीज में जिस कसावट के साथ कहानी को पेश किया था, फिल्म में वह प्रभाव पूरी तरह नजर नहीं आता।
करीब तीन घंटे लंबी फिल्म होने के बावजूद कई चीजें अधूरी सी लगती हैं। कई किरदारों और उनकी कहानियों को शामिल करने की कोशिश में कुछ कलाकारों को स्क्रीन पर बहुत कम जगह मिलती है। कहानी को विस्तार तो दिया गया है, लेकिन सब कुछ समेटने की कोशिश में फिल्म कुछ जगहों पर भटकती नजर आती है।
फिल्म में क्या अच्छा है?
- मुन्ना भैया की वापसी फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है।
- थिएटर में टाइटल थीम और बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा अनुभव देते हैं।
- कई किरदारों के बावजूद कहानी पूरी तरह पटरी से नहीं उतरती।
- ज्यादातर एक्शन सीन प्रभावी हैं।
फिल्म में क्या कमजोर है?
- वेब सीरीज जैसी कहानी की कसावट फिल्म में नहीं दिखती।
- कुछ हिस्से धीमे लगते हैं।
- कई जगह यह उत्सुकता नहीं बन पाती कि आगे क्या होने वाला है।
- क्लाइमैक्स समेत कुछ घटनाओं का अंदाजा पहले ही लग जाता है।
- गाने फिल्म की लंबाई को और बढ़ाते हुए महसूस होते हैं।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज के फैन हैं तो मुन्ना भैया को बड़े पर्दे पर देखने के लिए फिल्म देखी जा सकती है। हालांकि, फिल्म में सीरीज जैसी कसावट और लगातार रोमांच की कमी महसूस होती है। रवि किशन का अभिनय और मुन्ना भैया की वापसी फिल्म की बड़ी वजह हैं। कुल मिलाकर ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को 5 में से 3 स्टार दिए जा सकते हैं।





