भारत में बनेगा C-390 मिलिट्री विमान? एम्ब्रेयर-महिंद्रा की 80 विमानों की डील पर नजर, नागपुर में हो सकता है निर्माण

भारत के प्रस्तावित मध्यम परिवहन विमान (MTA) कार्यक्रम को लेकर एम्ब्रेयर और महिंद्रा ग्रुप ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। दोनों कंपनियों ने महाराष्ट्र के नागपुर को C-390 मिलेनियम के संभावित उत्पादन केंद्र के रूप में चुना है। यहां विमान की फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करने की योजना है। हालांकि, यह योजना तभी आगे बढ़ेगी जब भारत सरकार भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित करीब 80 मध्यम परिवहन विमानों के सौदे के लिए C-390 मिलेनियम का चयन करेगी और संबंधित ऑर्डर एम्ब्रेयर-महिंद्रा साझेदारी को मिलेगा।

भारतीय वायुसेना को करीब 80 विमानों की जरूरत

भारतीय वायुसेना पुराने सोवियत दौर के AN-32 और IL-76 परिवहन विमानों को बदलने के लिए मध्यम परिवहन विमान खरीदने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम में करीब 80 विमानों की जरूरत बताई जा रही है।

इस सौदे के लिए एम्ब्रेयर के C-390 मिलेनियम के अलावा एयरबस A400M और लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के पास पहले से 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान हैं।

नागपुर में क्या बनाने की तैयारी?

एम्ब्रेयर और महिंद्रा के प्रस्ताव के तहत नागपुर में C-390 मिलेनियम के लिए संभावित फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की जाएगी। यहां विमान की स्थानीय असेंबली के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन और सपोर्ट से जुड़ी क्षमताएं विकसित करने की योजना है।

दोनों कंपनियां महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर इस प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी तैयारियों पर काम कर रही हैं। कंपनियों के अनुसार, जरूरी औद्योगिक ढांचा तैयार करने की दिशा में शुरुआती काम किया जा रहा है, ताकि सौदा मिलने की स्थिति में उत्पादन से जुड़े कार्य तेजी से शुरू किए जा सकें।

सिर्फ असेंबली नहीं, सप्लाई चेन भी होगी विकसित

प्रस्तावित सुविधा का उद्देश्य केवल विमान को असेंबल करना नहीं है। साझेदारी के तहत भारत में मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग, सिस्टम इंटीग्रेशन, स्थानीय सप्लाई चेन और विमान के रखरखाव से जुड़ी क्षमताएं विकसित करने की योजना है।

अगर कार्यक्रम का ठेका मिलता है तो भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को धीरे-धीरे C-390 मिलेनियम के विभिन्न सिस्टम और सेवाओं से जोड़ने की योजना है। इसमें निर्माण, बिक्री के बाद की सेवाएं, प्रशिक्षण और विमान के पूरे जीवनकाल तक सपोर्ट शामिल हो सकता है।

महिंद्रा ने क्या कहा?

महिंद्रा ग्रुप की ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य विनोद सहाय ने कहा कि कंपनी भारत में विश्वस्तरीय एयरोस्पेस सिस्टम और विनिर्माण क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एम्ब्रेयर के साथ साझेदारी के जरिए बड़े स्तर के एयरोस्पेस कार्यक्रम को संभालने के लिए जरूरी औद्योगिक सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं।

उन्होंने नागपुर को इस तरह की परियोजना के लिए संभावित स्थान बताते हुए महाराष्ट्र सरकार के सहयोग की सराहना की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी तैयारियां भारत सरकार द्वारा C-390 मिलेनियम के चयन और भारतीय वायुसेना से ऑर्डर मिलने पर निर्भर हैं।

एम्ब्रेयर ने भी जताई साझेदारी मजबूत करने की बात

एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी के अध्यक्ष और सीईओ बोस्को दा कोस्टा जूनियर ने कहा कि कंपनी महिंद्रा के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने नागपुर को संभावित असेंबली सुविधा के रूप में चुने जाने को महत्वपूर्ण कदम बताया।

कंपनी के अनुसार, भारत में C-390 के लिए उत्पादन और सपोर्ट क्षमता विकसित करने से घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, यह पूरी योजना भारतीय वायुसेना के MTA कार्यक्रम में C-390 के चयन पर निर्भर है।

MRO क्षमता विकसित करने की भी योजना

एम्ब्रेयर और महिंद्रा भारत में C-390 मिलेनियम के लिए MRO यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल क्षमता विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। फरवरी 2026 में दोनों कंपनियों ने भारत में MRO क्षमता विकसित करने की योजना की जानकारी दी थी।

इसका उद्देश्य विमान के रखरखाव और दीर्घकालिक सपोर्ट के लिए भारत में ही जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करना है। इससे भविष्य में विमान के संचालन और रखरखाव से जुड़े कामों के लिए घरेलू क्षमता विकसित की जा सकती है।

कब हुआ था एम्ब्रेयर-महिंद्रा के बीच समझौता?

एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने पिछले साल अक्तूबर में रणनीतिक सहयोग समझौता किया था। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के MTA कार्यक्रम के लिए C-390 मिलेनियम को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाना था। यह समझौता फरवरी 2024 में दोनों कंपनियों के बीच हुए शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित था।

फिलहाल C-390 के लिए नागपुर में प्रस्तावित उत्पादन सुविधा एक संभावित योजना है। अंतिम फैसला भारत सरकार द्वारा MTA कार्यक्रम के लिए विमान के चयन और उसके बाद मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर करेगा।

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