बातचीत की मेज पर भारत-कनाडा, व्यापार और निवेश को लेकर बड़ा रोडमैप तैयार

भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच पहली आर्थिक और वित्तीय वार्ता के बाद द्विपक्षीय निवेश संधि यानी BIT पर जल्द बातचीत शुरू करने को लेकर सहमति बनी है। इसके साथ ही 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पहल मार्च 2026 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक में तय प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाती है। दोनों देशों ने 2026 के अंत तक कनाडा-भारत व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी CEPA की बातचीत पूरी करने का भी संकल्प दोहराया है।
भारत-कनाडा आर्थिक संवाद में निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और कारोबार के लिए बेहतर माहौल बनाने पर खास जोर दिया गया। बैठक में भारतीय बाजार में कनाडाई पेंशन फंड की मौजूदगी और दोनों देशों के वित्तीय संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच निवेश और साझेदारी के नए अवसर तलाशे जाएंगे।
डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भी भारत और कनाडा के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। कनाडा में यूपीआई के विस्तार का स्वागत किया गया है। स्थानीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी के जरिए सीमा पार भुगतान और रेमिटेंस को आसान और सस्ता बनाने की कोशिश की जाएगी। इससे व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और छोटे कारोबारों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच फिलहाल वस्तु व्यापार करीब 8 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है। ऐसे में 2030 तक इसे करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी माना जा रहा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई कंपनियों के साथ ऊर्जा, एआई और बुनियादी ढांचे समेत कई क्षेत्रों में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की है। अब दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने और तय लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए अगली आर्थिक और वित्तीय वार्ता 2027 में आयोजित की जाएगी।
भारत और कनाडा के बीच बढ़ता यह आर्थिक सहयोग दोनों देशों के व्यापार, निवेश, तकनीक और वित्तीय क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।





