एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: आरटीआई की ताकत से लेकर कानून में बदलाव तक, राधा रतूड़ी ने खुलकर रखी बात

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू हुए 20 साल से अधिक समय हो चुका है। इस कानून ने आम नागरिक को सरकारी कामकाज से जुड़ी जानकारी हासिल करने का अधिकार देकर उसकी आवाज को मजबूत किया है। हालांकि, कानून के दुरुपयोग को रोकने और इसे और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी बदलावों की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
उत्तराखंड सूचना आयोग की मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने आरटीआई कानून की उपयोगिता, सरकारी विभागों की जवाबदेही, सूचना आयोग की शक्तियों और कानून के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर अमर उजाला से खास बातचीत की।
‘आरटीआई ने आम आदमी के अधिकार को मजबूत किया’
राधा रतूड़ी ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून आम आदमी के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है। लोग राशन कार्ड, एफआईआर की कॉपी, स्थानांतरण पत्र, पहचान पत्र और गांवों में मनरेगा के तहत हुए कामकाज की जानकारी हासिल करने के लिए आरटीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस कानून ने अधिकारियों के सामने आम आदमी के अधिकार को मजबूत किया है और लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी को भी सशक्त बनाया है।
छोटी जानकारी के लिए आरटीआई लगना व्यवस्था पर सवाल
छोटी-छोटी जानकारियों के लिए भी लोगों को आरटीआई का सहारा लेने पर राधा रतूड़ी ने इसे लोक सेवकों की कार्यप्रणाली पर सवाल बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को स्थानांतरण पत्र, पेंशन, राशन या वोटर कार्ड जैसी सुविधाओं के लिए भटकना पड़े और फिर आरटीआई लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह समझना होगा कि उन्हें जनता पर शासन करने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने के लिए नियुक्त किया गया है।
विभागीय मैनुअल सार्वजनिक होने से कम होगा आरटीआई का बोझ
राधा रतूड़ी ने कहा कि कई सार्वजनिक उपक्रमों ने अब तक अपने मैनुअल जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराए हैं। यदि सरकारी विभाग अपने कामकाज और प्रक्रियाओं से जुड़े मैनुअल सार्वजनिक करें तो इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोग अपने अधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूक होंगे।
उन्होंने कहा कि विभागीय जानकारी सार्वजनिक होने से कई मामलों में लोगों को आरटीआई लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इससे सरकारी कामकाज में कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में भी मदद मिलेगी।
सूचना आयोग के पास कार्रवाई के अधिकार
सूचना आयोग की शक्तियों पर राधा रतूड़ी ने कहा कि यह पूरी तरह सही नहीं है कि आयोग के पास आदेश न मानने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि लापरवाही बरतने या आयोग के आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा नोटिस जारी करने और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करने का भी अधिकार है।
उन्होंने कहा कि आयोग का अंतिम उद्देश्य अधिकारियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम आदमी का काम करवाना है।
‘कुछ लोगों ने आरटीआई को बना लिया हथियार’
आरटीआई के दुरुपयोग को लेकर राधा रतूड़ी ने कहा कि कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उनके अनुसार, कुछ लोग एक ही सूचना को अलग-अलग तरीकों से बार-बार मांगते हैं और इसका उद्देश्य किसी अधिकारी, कंपनी या विभाग पर दबाव बनाना हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोक सूचना अधिकारियों को एक ही सूचना बार-बार देने में अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए। साथ ही, कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार को इसमें उचित बदलाव करने पर भी विचार करना चाहिए।





