हल्दी से फेरे तक का खर्च उठा स्टाफ और ग्रामीणों ने, इंसानियत की मिसाल

रंग-बिरंगी रोशनी से सजा सरकारी स्कूल भवन, कानों में रस घोलते मांगलिक गीत और नए कपड़ों में सजे ग्रामीण व स्कूल स्टाफ—डीडवाना-कुचामन जिले के ललासरी स्थित गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में पिछले करीब 10 दिन से कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। वजह थी दो सगी बहनों की शादी, जिसे पूरे स्कूल स्टाफ और गांव वालों ने मिलकर पारिवारिक जिम्मेदारी की तरह निभाया।

दरअसल, इसी स्कूल में कभी बंशी वाल्मीकि सफाईकर्मी के रूप में काम करते थे। करीब 10 साल पहले उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी दो बेटियां पूजा और सुनीता पिता की जगह स्कूल में सफाई का काम करने लगीं। समय के साथ दोनों बेटियां विवाह योग्य हो गईं, लेकिन सीमित साधनों के कारण शादी कर पाना परिवार के लिए चुनौती बन गया।

इस पर स्कूल के प्रिंसिपल हरवीर सिंह जाखड़ ने पहल करते हुए स्टाफ के साथ बैठक की और दोनों बेटियों की शादी कराने का निर्णय लिया। देखते ही देखते ललासरी गांव सहित आसपास के गांवों के लोग भी आगे आए। भामाशाहों से लेकर ग्रामीणों तक, सभी ने दिल खोलकर सहयोग किया।

हल्दी, मेहंदी, महिला संगीत से लेकर फेरे तक सभी रस्में स्कूल परिसर में ही पूरी हुईं। स्कूल भवन को भव्य तरीके से सजाया गया। मेहमानों का स्वागत स्कूल की छात्राओं ने राजस्थानी परिधान में तिलक लगाकर किया। शादी में सर्व समाज एक ही जाजम पर बैठा और सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की।

शनिवार को पूजा और सुनीता विवाह बंधन में बंध गईं। पूजा की शादी मकराना क्षेत्र के महेंद्र से और सुनीता की शादी डीडवाना के कीचक गांव निवासी नरसी से हुई। इस दौरान स्कूल स्टाफ अभिभावक की भूमिका में नजर आया और कई शिक्षक भावुक भी हो गए।

दोनों बहनों ने कहा कि पिता की कमी हमेशा रहेगी, लेकिन आज पूरा गांव उनके लिए परिवार बनकर खड़ा है। वहीं पंचायत समिति सदस्य महेंद्र शेखावत ने इसे गांव के लिए गौरव की बात बताते हुए कहा कि यह पहल सामाजिक बदलाव की एक मिसाल है।

इस शादी ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो सरकारी स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि संवेदनाओं और इंसानियत का घर भी बन सकता है।

Related Articles

Back to top button