मानसून सत्र से पहले रणनीति तैयार, 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक; विपक्ष के निशाने पर कई मुद्दे

संसद के मानसून सत्र से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार आगामी सत्र के विधायी एजेंडे की जानकारी सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा करेगी, जबकि विपक्ष उन मुद्दों को उठाएगा जिन पर वह संसद में सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि इस बार का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है।
संसदीय परंपरा के तहत हर सत्र से पहले आयोजित होने वाली इस बैठक का उद्देश्य सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना और विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाना होता है। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकार का विधायी एजेंडा काफी व्यापक हो सकता है और कई अहम बिलों पर चर्चा की संभावना है।
दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने जा रहा है। विपक्षी दल NEET-UG पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मुद्दों, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान, विभिन्न राजनीतिक दलों में टूट-फूट और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं। कांग्रेस पहले ही रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे चुकी है, जिससे सत्र के दौरान तीखी बहस के आसार बढ़ गए हैं।
हाल के दिनों में कई राजनीतिक दलों में हुए विभाजन भी संसद में चर्चा का विषय बन सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई दलों में हुए राजनीतिक बदलावों को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साधने की रणनीति बना रहा है। इसके अलावा सदन में सांसदों की नई बैठने की व्यवस्था जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही जानकारी दे चुके हैं कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है, जिनमें 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा लाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इसी बैठक से यह संकेत मिल जाएगा कि आगामी मानसून सत्र शांतिपूर्ण रहेगा या फिर सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव और हंगामे का गवाह बनेगा।





