रुपया कमजोर, लेकिन महंगाई पर सीमित प्रभाव; खाद्य आयात कम होने से दबाव घटा

भारतीय रुपये में तेज गिरावट के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये के अवमूल्यन का प्रभाव सीमित रहेगा, क्योंकि भारत खाद्य आयात पर बहुत कम निर्भर है और कई प्रमुख कृषि उत्पादों में लगभग आत्मनिर्भर है।

खाद्य आयात पर निर्भरता कम, इसलिए राहत

रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति रुपये की कमजोरी से बहुत प्रभावित नहीं होगी। अनुमान है कि रुपये में 5% गिरावट से भी वार्षिक CPI महंगाई में केवल 15–25 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।
भारत में CPI बास्केट में खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 46% है, लेकिन अधिकांश खाद्य उत्पाद घरेलू रूप से ही उपलब्ध होने के कारण आयात-जनित महंगाई सीमित रहती है।

किन उत्पादों में बढ़ सकता है दबाव?

हालांकि रिपोर्ट ने चेताया है कि सोना, खाद्य तेल और दाल जैसे आयात-निर्भर उत्पादों में कीमतों का दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि इन पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार और मुद्रा उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है।

रुपया हाल के दिनों में तेजी से गिरा है और 4 दिसंबर 2025 को 90.19 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद खाद्य आयात निर्भरता कम होने से CPI पर व्यापक प्रभाव की आशंका नहीं है।

घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीमित असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में कमजोरी को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन CPI की संरचना और कृषि आत्मनिर्भरता बताते हैं कि मुद्रा अवमूल्यन से उत्पन्न महंगाई दबाव सीमित रहने की उम्मीद है।

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