ग्लोबल इकोनॉमी में राहत: फेड की तीसरी रेट कट, भारत में 2026 तक स्थिर रह सकता है रेपो रेट

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने साल के अंत में लगातार तीसरी बार ब्याज दर में कटौती की है। फेड ने फेडरल फंड्स रेट को घटाकर 3.50% से 3.75% की रेंज में कर दिया है। वर्ष 2025 में कुल 75 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका का श्रम बाजार लगातार कमजोर होता दिख रहा है और सरकारी शटडाउन के कारण नए आर्थिक आंकड़े समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं।

इधर भारत में बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दिपानविता मजूमदार ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई का रेपो रेट 2026 में करीब 5% के स्तर पर स्थिर रह सकता है। उनका कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच नीतिगत दरों का अंतर फिलहाल नियंत्रण में है। इसका कारण यह है कि अमेरिका की तुलना में आरबीआई ने ब्याज दरें ज्यादा तेजी से घटाई हैं, जिससे ब्याज उपज में अंतर भी समान रुझान दिखा रहा है। इससे शुरुआती महीनों में विदेशी निवेश (FPI) का प्रवाह भी बढ़ा था।

हालांकि रुपये की अस्थिरता ने हाल के दिनों में निवेश के प्रवाह पर असर डाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच ऊंचा उपज अंतर विदेशी निवेश को सहारा दे सकता है और इससे रुपये को भी कुछ मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू खाद्य कीमतों में सुधार के चलते मुद्रास्फीति भी भारत के पक्ष में रहने की संभावना है।

गौरतलब है कि आरबीआई ने पिछले सप्ताह रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया था। सीआरआर 3% पर बरकरार रखा गया है और स्थायी जमा सुविधा दर को 5.25% से घटाकर 5% किया गया है।

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