पाकिस्तान में जन्मे मनमोहन कृष्ण ने बॉलीवुड में इस तरह बनाई पहचान, पढ़ें उनके अनसुने किस्से

आज बॉलीवुड के दिवंगत कलाकार मनमोहन कृष्ण की जयंती है। वह बॉलीवुड का बड़ा नाम हैं। वह अभिनेता होने के साथ निर्देशक और गायक भी थे। उन्होंने फिल्मों में चार दशकों तक काम किया। इस दौरान कई चरित्र भूमिकाएं निभाईं। कम ही लोगों को पता है कि वह सिंगर बनना चाहते थे हालांकि वह एक्टर के तौर पर मशहूर हुए। आज उनकी जयंती के मौके पर आइए उनके बारे में कुछ खास बातें जान लेते हैं।

पहले बने भौतिकी के प्रोफेसर
मनमोहन कृष्ण का जन्म 26 फरवरी साल 1922 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। उन्होंने भौतिकी के प्रोफेसर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। उन्हें कॉलेज में बच्चों को पढ़ाना पसंद था। उन्होंने भौतिकी में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की थी। उन्होंने कॉलेज में दो साल तक बच्चों को पढ़ाया, इसके बाद बॉलीवुड का रुख किया।

रेडियो में की एंकरिंग
मनमोहन कृष्ण सिंगर बनना चाहते थे। इसलिए उनका रुझान रेडियो की तरफ था। वह कुछ दिनों तक रेडियो से जुड़े रहे। उन्होंने रेडियो शो ‘कैडबरी की फुलवारी’ नाम के एक गायन प्रतियोगिता का संचालन किया। यह कार्यक्रम काफी मशहूर हुआ।

चोपड़ा बंधुओं के पसंदीदा थे कृष्ण
मनमोहन कृष्ण ने बॉलीवुड करियर की शुरुआत बतौर अभिनेता ‘अंधों की दुनिया (1947)’ से की थी। वह चोपड़ा बंधुओं के पसंदीदा अभिनेता थे। मनमोहन कृष्ण ने उनके द्वारा निर्देशित या निर्मित फिल्मों में कई छोटी-बड़ी भूमिकाएं निभाईं। दीवार, त्रिशूल, दाग, हमराज, जोशीला, कानून, साधना, काला पत्थर, वक्त और नया दौर में उन्होंने काम किया।

सहायक अभिनेता के लिए मिला पुरस्कार
मनमोहन कृष्ण ने लगभग 250 फिल्मों में काम किया। इनमें से कई फिल्में कामयाब रहीं। उनकी बेहतरीन फिल्मों में दौर (1957), खानदान (1965), साधना (1958), वक्त (1965) और हमराज (1967) शामिल हैं। फिल्म ‘बीस साल बाद (1962)’ में उनके अभिनय के लिए उनकी खूब तारीफ हुई। फिल्म ‘धूल का फूल’ (1960) में उन्होंने अब्दुल रशीद की भूमिका निभाई। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार दिया गया।

कृष्ण की फिल्म को मिला नेशनल अवॉर्ड
मनमोहन कृष्ण ने ख्वाजा अहमद अब्बास की ‘शहर और सपना (1963)’ में अहम भूमिका निभाई। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। उन्होंने पहली इंडो-सोवियत सह-निर्माण फिल्म ‘परदेसी (1957)’ में अभिनय किया। इस फिल्म को 1958 के कान फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन पाम के लिए नामांकित किया गया था। यही नहीं मनमोहन कृष्ण ने 12 पंजाबी फिल्मों में भी अभिनय किया है।

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