INSAS की जगह लेगा स्वदेशी शेर, यूपी के अमेठी में बनी पहली 100% भारतीय AK-203 राइफल

उत्तर प्रदेश के अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी एके-203 राइफल ‘शेर’ भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने जा रही है। अमेठी के कोरवा स्थित संयंत्र में बनी इस राइफल की खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल किया गया हर पुर्जा और कच्चा माल भारतीय उद्योग से लिया गया है।

एके-203 राइफल को भारतीय सेना की दशकों पुरानी 5.56 मिलीमीटर INSAS राइफल की जगह शामिल किया जा रहा है। भारत-रूस सहयोग से शुरू हुई यह परियोजना अब पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन के स्तर तक पहुंच गई है। डिजाइन रूसी मूल का जरूर है, लेकिन ‘शेर’ नाम से तैयार इस संस्करण का उत्पादन भारतीय उद्योग की पूरी श्रृंखला पर आधारित है।

सितंबर में होगा स्वदेशी संस्करण का परीक्षण

रक्षा मंत्रालय और इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच करीब 6.01 लाख एके-203 राइफलों की आपूर्ति का करार हुआ है। इस अनुबंध की कीमत करीब 5,200 करोड़ रुपये बताई गई है। पूरी तरह स्वदेशी संस्करण का परीक्षण भारतीय सेना सितंबर में करेगी।

शुरुआती दौर में कोरवा संयंत्र में रूस से मिली तकनीक के आधार पर राइफलों का निर्माण शुरू हुआ था। उस समय राइफल में विदेशी उपकरणों और पुर्जों का इस्तेमाल होता था। अब इसे पूरी तरह भारतीय पुर्जों और कच्चे माल से तैयार किया गया है। राइफल का फायरिंग और बर्स्ट फायरिंग परीक्षण भी किया जा चुका है।

2030 तक आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य

कंपनी को कुल 6,01,427 राइफलों की आपूर्ति अक्टूबर 2032 तक करनी है। हालांकि उत्पादन क्षमता बढ़ाकर इस लक्ष्य को तय समय से पहले, दिसंबर 2030 तक पूरा करने की योजना है। वर्ष 2026 से उत्पादन क्षमता बढ़ाकर करीब 12 हजार राइफल प्रतिमाह करने का लक्ष्य रखा गया है।

कोरवा संयंत्र में उत्पादन व्यवस्था को इस स्तर तक विकसित करने की योजना है कि भविष्य में हर 100 सेकंड में एक एके-203 राइफल तैयार की जा सके।

सीमा पर तैनात जवानों की नई ताकत बनेगी ‘शेर’

7.62×39 मिलीमीटर क्षमता वाली एके-203 को मजबूत, विश्वसनीय और संचालन में आसान आधुनिक असॉल्ट राइफल माना जा रहा है। इसे उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के साथ-साथ आतंकवाद रोधी अभियानों में तैनात जवानों के प्रमुख व्यक्तिगत हथियार के रूप में शामिल करने की तैयारी है।

अमेठी के कोरवा संयंत्र में बनी यह पूरी तरह स्वदेशी ‘शेर’ राइफल भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

Related Articles

Back to top button