भारत-UK व्यापार समझौते की शुरुआत, 99% निर्यात शुल्क मुक्त; जानिए किन चीजों पर पड़ेगा असर

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) बुधवार से प्रभावी हो गया है। इसे भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जबकि ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा
सरकार के अनुसार, CETA लागू होने से किसानों, एमएसएमई, उद्योगों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और सेवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। ब्रिटेन में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यात को नई गति मिलेगी।
ब्रिटिश उत्पादों पर घटेगा आयात शुल्क
समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की समेत कई ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की जाएगी। स्कॉच व्हिस्की पर वर्तमान 150 प्रतिशत आयात शुल्क पहले चरण में घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और अगले दस वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाली कारों, ट्रकों और अन्य चुनिंदा उत्पादों पर भी चरणबद्ध तरीके से शुल्क कम होगा।
ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव
यह पहला अवसर है जब भारत ने किसी मुक्त व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। तैयार कारों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक किया जाएगा। वहीं ट्रकों पर शुल्क भी चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।
आईटी और प्रोफेशनल्स को राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों को वित्तीय राहत मिलेगी।
कुछ संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने सेब, अखरोट, कुछ बीज, सोने की ईंटों और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को शुल्क रियायत के दायरे से बाहर रखा है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी और कुछ मांस उत्पादों को इस समझौते में शामिल नहीं किया है।
सरकार का कहना है कि CETA केवल शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं, सरकारी खरीद और रोजगार के क्षेत्र में भारत और ब्रिटेन के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा।





