India-Russia Space Deal: ISRO को मिलेगा तकनीकी सहयोग, गगनयान मिशन को फायदा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos के साथ सेमी-क्रायोजेनिक इंजन की आपूर्ति को लेकर मॉस्को में अहम तकनीकी चर्चा की है। इसरो की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, इस संबंध में ड्राफ्ट कॉन्ट्रैक्ट तैयार हो चुका है और फिलहाल मंजूरी के चरण में है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?

सेमी-क्रायोजेनिक इंजन भारत के भविष्य के हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल्स के लिए बेहद अहम तकनीक माना जा रहा है। यह इंजन लिक्विड ऑक्सीजन और केरोसीन पर आधारित होता है, जिससे ज्यादा थ्रस्ट और बेहतर दक्षता मिलती है।

इस तकनीक के इस्तेमाल से भारत भारी पेलोड लॉन्च करने और डीप स्पेस मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम होगा। साथ ही, मानव अंतरिक्ष मिशनों को भी इससे बड़ा तकनीकी समर्थन मिलेगा।

स्वदेशी विकास के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग

ISRO पहले से ही स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम पर काम कर रहा है। हालांकि, Roscosmos के साथ सहयोग से इस तकनीक के विकास में तेजी आने और जटिल चुनौतियों को दूर करने की उम्मीद है।

सफल परीक्षण से मिली मजबूती

इसरो ने 28 मार्च 2025 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (SE2000) के पावर हेड का सफल हॉट टेस्ट किया था। यह इंजन लगभग 2000 किलोन्यूटन थ्रस्ट उत्पन्न करने में सक्षम है और भविष्य में LVM3 रॉकेट के सेमी-क्रायोजेनिक बूस्टर स्टेज को शक्ति देगा।

इससे रॉकेट की पेलोड क्षमता भी बढ़ेगी, जो वर्तमान में लगभग 4 टन है और इसे 5 टन तक बढ़ाया जा सकता है।

वैश्विक सहयोग को मिल रहा बढ़ावा

रूस के साथ यह साझेदारी भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग नीति का हिस्सा है। इसके तहत भविष्य में वीनस ऑर्बिटर मिशन जैसे प्रोजेक्ट्स में भी सहयोग की संभावनाएं हैं, जहां रूस एक पेलोड पार्टनर के रूप में शामिल हो सकता है।

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