पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तार पर विपक्ष का जोरदार विरोध, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

श्रीलंका में जारी राजनीतिक घमासान के बीच पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। रविवार को कोलंबो में देश के सभी विपक्षी दलों ने एक साथ प्रेस वार्ता कर इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। साथ ही इस गिरफ्तारी को गैर-लोकतांत्रिक और राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया। मामले में पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने कहा कि हमारे देश में हमेशा से खुली और लोकतांत्रिक व्यवस्था रही है, लेकिन इस तरह की कार्रवाइयां उन मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

पूर्व राष्ट्र विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी के खिलाफ श्रीलंका पीपुल्स फ्रंट (एसएलपीपी) ने भी अपना जोरदार विरोध जताया है। पार्टी के महासचिव सागरा करियावसाम ने कहा कि भले ही उनकी पार्टी रानिल विक्रमसिंघे की राजनीति से सहमत नहीं है, लेकिन राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए की गई कार्रवाई का विरोध किया जाना चाहिए।

श्रीलंकाई सरकार ने कानून का दिया हवाला
हालांकि पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी को लेकर जारी सियासी गर्माहट को देखते हुए श्रीलंकाई सरकार ने अपना पक्ष भी सामने रखा है। जहां सरकार की ओर से नेशनल पीपल्स पावर (एनपीपी) के वकीलों ने कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वह राष्ट्रपति हो, सांसद हो या आम नागरिक। अधिवक्ता उपुल कुमारापेरुमा ने कहा कि विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है, जबकि अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला लिया है। वहीं वकील अकलंका उक्वत्ता और जयंता देहियाट्टगे ने भी विपक्ष की चुनिंदा नाराजगी पर सवाल उठाए और कहा कि आम जनता में इस गिरफ्तारी को लेकर कोई विरोध नहीं है।

अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर नहीं
बता दें कि 76 वर्षीय रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार को राजकीय धन के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 26 अगस्त तक जेल भेज दिया था। विक्रमसिंघे पर श्रीलंकाई दंड संहिता की धारा 386 और 388 और पब्लिक प्रॉपर्टीज एक्ट की धारा 5(1) के तहत आरोप लगाए गए हैं। अगर दोषी पाए गए, तो उन्हें 1 से 20 साल तक की जेल हो सकती है।

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