अनमैप्ड वोटर्स पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, तकनीकी दिक्कत के चलते सुनवाई रोकी

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अनमैप्ड मतदाताओं से जुड़ी सुनवाई को फिलहाल रोक दिया है। यह सुनवाई शनिवार से शुरू हुई थी, जिसमें 32 मामलों पर विचार किया जाना था। आयोग ने वर्ष 2002 की मतदाता सूची में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों को इसका कारण बताया है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, अनमैप्ड मतदाता वे हैं जिनका विवरण 2002 की मतदाता सूची के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि राज्य में हुए पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 2002 की चुनावी सूचियों के पीडीएफ संस्करण को पूरी तरह से सीएसवी फॉर्मेट में रूपांतरित नहीं किया जा सका। इसी कारण कई मतदाताओं की बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐप में लिंकिंग असफल रही।

सत्यापन के बाद होगा मामलों का निपटारा

आयोग के निर्देशानुसार, 2002 की मतदाता सूची से जुड़े अंश संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को सत्यापन के लिए भेजे जा सकते हैं। सत्यापन के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर उचित निर्णय लेंगे। इसके अलावा BLO को फील्ड सत्यापन के लिए तैनात किया जाएगा, ताकि संबंधित मतदाताओं की तस्वीरें लेकर उन्हें सिस्टम में अपलोड किया जा सके।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मिला सुरक्षा कवर

इस बीच, राज्य में चल रहे SIR अभ्यास के चलते संभावित खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को सशस्त्र सुरक्षा प्रदान की है। गृह मंत्रालय के 26 दिसंबर के आदेश के बाद कोलकाता में उन्हें CISF की Y-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। CISF की VIP सुरक्षा इकाई के 11–12 सशस्त्र कर्मियों को उनकी व्यक्तिगत और आवासीय सुरक्षा में तैनात किया गया है।

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