जैव विविधता संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। इस दौरान जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदाय, खेती और वैज्ञानिक प्रयासों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने की। उन्होंने जैव विविधता की वर्तमान स्थिति, पर्यावरणीय चुनौतियों और भविष्य में प्रकृति संरक्षण की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
मुख्य वक्ता डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि अधिकांश कीट खेती और पर्यावरण के लिए लाभकारी होते हैं। उन्होंने फसलों की वृद्धि, मिट्टी की उर्वरता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में कीटों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं, डॉ. प्रियंका अधिकारी ने खेती में जैव उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और उनके फायदों की जानकारी दी। इंजीनियर दीप चंद्र बिष्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और प्रकृति संरक्षण के लिए मधुमक्खी पालन को उपयोगी माध्यम बताया।
कार्यक्रम का समापन विज्ञान केंद्र परिसर में पौधारोपण के साथ हुआ। इसमें विभिन्न गांवों की महिलाओं, एसएसजे विश्वविद्यालय के शोध छात्र-छात्राओं, स्कूली विद्यार्थियों और अन्य संस्थाओं से जुड़े करीब 80 लोगों ने भाग लिया।





