1984 नरसंहार को लेकर सियासी घमासान तेज, रेखा गुप्ता ने गांधी परिवार पर उठाए सवाल

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर गांधी परिवार और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। रविवार को दिल्ली में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के दौरान उन्होंने 1984 की हिंसा को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। वहीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस घटना को दंगा नहीं, बल्कि नरसंहार बताया।
रेखा गुप्ता ने गांधी परिवार पर साधा निशाना
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मार्च में शामिल हुईं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सिख समुदाय आज भी 1984 की हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि नवंबर 1984 में जो हुआ, क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी? रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने बार-बार लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल, 1984 की हिंसा और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिलने का आरोप
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि 1984 की हिंसा में अपने प्रियजनों को खोने वाले हजारों सिख परिवार आज भी दुख और पीड़ा से गुजर रहे हैं। उनके मुताबिक, पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय का इंतजार है।
उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गांधी परिवार ने कभी पीड़ित परिवारों के दुख को दूर करने के लिए कोई ठोस पहल की? रेखा गुप्ता ने कहा कि मार्च में शामिल सिख समुदाय के लोग कांग्रेस और उसके सहयोगियों से जवाब मांग रहे हैं।
हरदीप सिंह पुरी बोले- इसे नरसंहार कहना ही सही
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी 1984 की हिंसा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उस दौरान 2,733 लोगों की हत्या हुई थी। इस घटना को आमतौर पर दंगा कहा जाता है, लेकिन उनके मुताबिक इसके लिए सही शब्द नरसंहार है।
पुरी ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस घटना को मानवता के खिलाफ अपराध बताए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि विरोध मार्च के लिए एक नवंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई।
दिल्ली में मार्च के दौरान बांधी गईं काली पट्टियां
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 1984 की हिंसा में मारे गए सिखों की याद में सिर पर काली पट्टियां बांधीं। इस दौरान कांग्रेस और गांधी परिवार के खिलाफ बयानबाजी भी हुई।
1984 की सिख विरोधी हिंसा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा नेताओं ने पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस को घेरा।





