फ्रांस में कानून-व्यवस्था पर संकट: पीएम के कर्फ्यू निर्देश, गृह मंत्री को पद पर बनाए रखेंगे राष्ट्रपति

फ्रांस में हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने संवेदनशील इलाकों में जरूरत के मुताबिक सीमित समय के लिए कर्फ्यू लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के इस्तीफे की पेशकश ठुकरा दी है।

कई शहरों में हिंसा और आगजनी

फ्रांस की राजधानी पेरिस के अलावा लियोन और मार्सेई समेत कई शहरों में उपद्रवियों ने कूड़ेदानों, साइकिलों और अन्य सामान में आग लगा दी। कई दुकानों में लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। इससे पहले शनिवार को महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में कम से कम 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया

हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, मौजूदा हालात में पुलिस और सुरक्षा बलों के नेतृत्व के लिए गृह मंत्री का पद पर बने रहना जरूरी है।

मैक्रों ने गृह मंत्री को हिंसा से पहले सुरक्षा तैयारियों और खुफिया जानकारी जुटाने में हुई चूकों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पुलिस की कार्यशैली में बदलाव लाने को भी कहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

ऐतिहासिक सिटी हॉल में लगी भीषण आग

हिंसा के दौरान मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में 19वीं सदी की ऐतिहासिक सिटी हॉल इमारत आग की चपेट में आ गई। आग इतनी भीषण थी कि इमारत की छत ढह गई और भवन को भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना ने सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मार्सेई में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध

हिंसा को नियंत्रित करने के लिए मार्सेई प्रशासन ने सोमवार दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक विरोध प्रदर्शनों और अन्य सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार अब संवेदनशील इलाकों में सीमित कर्फ्यू, पुलिस की रणनीति में बदलाव और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी की जान नहीं गई। उन्होंने हिंसक भीड़ का सामना करने वाले पुलिसकर्मियों के काम का भी बचाव किया। वहीं, गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ बड़े शहरों में हालात प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो गए थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर तैयारी जरूरी है।

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