सरकारी जमीन पर कब्जा कर चलाता था अपनी ‘सरकार’, 30 हजार के विवाद ने खोले हिस्ट्रीशीटर के राज

उत्तर प्रदेश के झांसी में खुद को ‘काली सरकार’ बताने वाले हरदोई निवासी हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। आरोप है कि उसने मऊरानीपुर क्षेत्र में करीब 25 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन पर कब्जा कर आश्रम बनवा लिया था। वह पिछले कई वर्षों से पहचान बदलकर इस इलाके में रह रहा था। बताया जा रहा है कि महज 30 हजार रुपये के विवाद के बाद उसकी असलियत सामने आई।
सरकारी जमीन पर आश्रम बनाने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, प्रदीप शुक्ला ने मऊरानीपुर के चितावन ग्राम पंचायत के कांजा मौजा में मंदिर और आश्रम का निर्माण कराया था। स्थानीय लोगों ने पहले भी सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत की थी, लेकिन मामले में जांच नहीं हो सकी थी।
ग्राम प्रधान राहुल दांगी के अनुसार, संबंधित जमीन सरकारी है। वहीं, एसडीएम मनोज कुमार ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
बताया गया है कि प्रदीप ने पुलिस से बचने के लिए अपनी पहचान बदल ली थी। वह खुद को ‘काली सरकार’ बताकर दरबार लगाता था। इस दौरान पर्ची निकालकर लोगों को उनका भविष्य बताने और बीमारी व परेशानियां दूर करने का भरोसा दिलाता था।
आश्रम में नाबालिगों को सेवादार बनाने की चर्चा
प्रदीप की गिरफ्तारी के बाद उसके आश्रम में सन्नाटा पसरा हुआ है। मुख्य गेट पर ताला लगा है और परिसर में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। आश्रम के अंदर एक कंट्रोल रूम से गतिविधियों पर नजर रखे जाने की बात भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आश्रम में नाबालिगों को सेवादार के रूप में रखा जाता था। इनमें से तीन नाबालिग प्रदीप के करीबी और भरोसेमंद बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। गिरफ्तारी के बाद से वे भी दिखाई नहीं दे रहे हैं।
30 हजार रुपये के विवाद के बाद दर्ज हुई शिकायत
प्रदीप उर्फ काली सरकार की पहचान सामने आने की वजह मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र जोशी के साथ हुआ विवाद बताया जा रहा है। राजेंद्र के मुताबिक, उन्होंने प्रदीप को 30 हजार रुपये दिए थे। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय प्रदीप उन पर पर्ची बनवाने का दबाव डाल रहा था।
राजेंद्र का दावा है कि पर्ची बनवाने से इनकार करने पर प्रदीप ने 20 दिन के भीतर उनके परिवार को नष्ट हो जाने की धमकी दी। विवाद बढ़ने पर उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और प्रदीप की पहचान उजागर हुई।
अलग-अलग जगहों पर विवाद के बाद बदलता रहा ठिकाना
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रदीप पिछले कई वर्षों में झांसी के अलग-अलग इलाकों में रह चुका था। वर्ष 2011 में वह मऊरानीपुर के एक गेस्ट हाउस में रहकर कथित तौर पर तांत्रिक गतिविधियां करता था और दर्द की दवाएं देता था। वहां विवाद होने के बाद उसे जगह छोड़नी पड़ी।
इसके बाद वह लहचूरा के धवाकर गांव में एक फार्म हाउस पर करीब तीन महीने रहा, लेकिन वहां भी विवाद होने के बाद चला गया। बताया जाता है कि वह खदरका, मारकुआं और बम्होरी समेत अन्य जगहों पर भी रहा। स्थानीय लोगों के विरोध और विवादों के चलते उसे कई बार अपना ठिकाना बदलना पड़ा।
गिरफ्तारी के बाद अन्य मामलों की भी जांच
प्रदीप शुक्ला के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर होने की जानकारी सामने आई है। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके अन्य कथित कारनामों और गतिविधियों की भी जांच कर रही है। सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत की जांच प्रशासन की ओर से कराई जाएगी।
फिलहाल, सरकारी जमीन पर कब्जे और आश्रम में नाबालिगों को रखने से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।





