श्रुति गंगवार को भाजपा ने बनाया राज्यसभा प्रत्याशी, रुहेलखंड में सियासी समीकरण साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने बरेली की श्रुति गंगवार को अपना उम्मीदवार बनाया है। श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल और बरेली से आठ बार सांसद रह चुके संतोष गंगवार की बेटी हैं। भाजपा के इस फैसले को बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों में श्रुति गंगवार का नाम शामिल है। चुनाव 16 अक्टूबर को होना है। श्रुति फिलहाल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक बरेली की चेयरपर्सन हैं और उद्यमिता, बैंकिंग, तकनीक तथा सामाजिक क्षेत्र में काम कर चुकी हैं।
IIT रुड़की और IIM बंगलूरू से पढ़ाई
श्रुति गंगवार ने IIT रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने IIM बंगलूरू से एंटरप्रेन्योरशिप मैनेजमेंट की शिक्षा ली। पेशेवर करियर की शुरुआत उन्होंने इंफोसिस से की और आईटी क्षेत्र की कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर काम किया।
इसके बाद उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी। वर्ष 2012 में बंगलूरू में शिक्षा और आईटी से जुड़ा एडटेक स्टार्टअप शुरू किया। इसके बाद 2016 में नोएडा में आईटी सर्विसेज कंपनी स्थापित की। कंपनी के जरिए युवाओं और महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बैंकिंग क्षेत्र में भी सक्रिय
श्रुति गंगवार का बरेली से संस्थागत जुड़ाव अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के जरिए मजबूत हुआ। अगस्त 2024 में उन्हें बैंक की चेयरपर्सन निर्विरोध चुना गया था। इससे पहले उनकी मां सौभाग्यवती गंगवार के निधन के बाद वह बैंक के निदेशक मंडल में निर्विरोध चुनी गई थीं।
बैंक की जिम्मेदारी संभालते हुए श्रुति ने डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा और सदस्य जागरूकता जैसे मुद्दों पर जोर दिया। बैंक की ओर से छोटे कारोबारियों और कम आय वाले लोगों के लिए माइक्रो क्रेडिट जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
शिक्षा और समाजसेवा में भी सक्रियता
श्रुति गंगवार की प्रोफाइल में सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख है। उनके अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न पहलों के माध्यम से 22 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाई गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी काम किया गया।
भारत सेवा ट्रस्ट के माध्यम से पिछले कई वर्षों से नेत्र जांच और मोतियाबिंद शिविर आयोजित किए जाने की बात भी उनकी प्रोफाइल में कही गई है। इन शिविरों में जरूरतमंद लोगों को जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
2004 से भाजपा के अभियानों में सक्रिय
श्रुति गंगवार के मुताबिक, वह लंबे समय से भाजपा के चुनावी और संगठनात्मक अभियानों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के अभियानों में भाग लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी बरेली लोकसभा क्षेत्र की विभिन्न विधानसभाओं में संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी रही।
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से पहले भी वह बरेली और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आती रही हैं।
संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत
श्रुति गंगवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि को उनके पिता संतोष गंगवार की लंबी राजनीतिक पारी से अलग करके देखना मुश्किल है। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह झारखंड के राज्यपाल हैं।
भाजपा की ओर से श्रुति को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बरेली की राजनीति में गंगवार परिवार की अगली पीढ़ी की सक्रिय भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
महिला और युवा नेतृत्व पर भी जोर
भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में श्रुति गंगवार के अलावा पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को भी जगह मिली है। ऐसे में पार्टी की सूची में महिला चेहरों को भी प्रतिनिधित्व मिला है।
श्रुति के चयन में उनकी राजनीतिक विरासत के साथ-साथ उद्यमिता, तकनीकी अनुभव, बैंकिंग और सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता को भी अहम माना जा रहा है। अब राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर उनके सामने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान बनाने की चुनौती होगी।
श्रुति गंगवार का नाम सामने आने के बाद बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि संतोष गंगवार की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक विरासत अब नई पीढ़ी के हाथों किस तरह आगे बढ़ती है।





