रेलवे की संपत्तियों के मौद्रीकरण में सुस्ती, पिछले साल के 21 हजार करोड़ के मुकाबले अब तक 7 हजार करोड़

रेलवे की संपत्तियों के मौद्रीकरण की रफ्तार चालू वित्त वर्ष में धीमी नजर आ रही है। अब तक विभिन्न परिसंपत्तियों के जरिए करीब 7,000 करोड़ रुपये ही जुटाए गए हैं। जबकि पिछले वित्त वर्ष में रेलवे ने मौद्रीकरण से लगभग 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) शुरू की थी। इसके दूसरे चरण यानी NMP 2.0 को फरवरी 2026 में लॉन्च किया गया। इसके तहत वर्ष 2026 से 2030 के बीच 12 क्षेत्रों से कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे के लिए इसमें 2.62 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित है।
किन संपत्तियों से जुटाई जा रही रकम?
रेलवे की मौद्रीकरण योजना में कई तरह की परिसंपत्तियां शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत रेलवे स्टेशनों का विकास, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, फ्रेट टर्मिनल, रेलवे ट्रैक, गुड्स शेड, रेलवे कॉलोनियां और खाली पड़ी जमीन जैसी संपत्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा रेलवे की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी के आंशिक विनिवेश को भी मौद्रीकरण योजना का हिस्सा बनाया गया है।
2.62 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
रेलवे के लिए तय 2.62 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य में अलग-अलग परिसंपत्तियों के लिए अलग राशि निर्धारित की गई है। इसमें स्टेशन एस्टेट के विकास से करीब 1 लाख करोड़ रुपये, रेलवे पीएसयू में विनिवेश से 83,700 करोड़ रुपये, फ्रेट टर्मिनल से 18,000 करोड़ रुपये और सीधे स्टेशन विकास से 7,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।
रेलवे कॉलोनियों और अन्य खाली भूमि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से भी पांच साल में करीब 43,800 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
लक्ष्य हासिल करना चुनौती
चालू वित्त वर्ष में अब तक 7,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का आंकड़ा बताता है कि रेलवे को निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मौद्रीकरण की रफ्तार बढ़ानी होगी। जानकारों के अनुसार, रेलवे की भूमि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण और PPP परियोजनाओं में तेजी के बिना तय लक्ष्य को समय पर हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रेलवे के लिए तय किए गए बड़े लक्ष्य को देखते हुए आने वाले वर्षों में परियोजनाओं की गति और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस योजना की प्रगति में अहम भूमिका निभा सकती है।





