मध्य-पूर्व में बढ़ रहा ड्रैगन का प्रभाव: मिस्र के साथ रिश्ते मजबूत कर रहे शी, अमेरिका की बढ़ी चिंता

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिवसीय मिस्र दौरे पर हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब बीजिंग पश्चिम एशिया में अपना आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
शी जिनपिंग मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से बातचीत करेंगे। दोनों देशों के बीच आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना इस दौरे का प्रमुख मुद्दा माना जा रहा है।
मिस्र क्यों अहम है?
मिस्र अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। ऐसे में शी जिनपिंग का काहिरा पहुंचना सिर्फ चीन-मिस्र संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसे पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
शी मंगलवार शाम काहिरा पहुंचे। एयरपोर्ट पर चीन और मिस्र के झंडों से उनका स्वागत किया गया। राष्ट्रपति अल-सीसी और सैन्य गार्डों ने रेड कार्पेट समारोह में उनका स्वागत किया।
चीन-मिस्र रिश्तों में क्यों आई तेजी?
इस साल चीन और मिस्र के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
मिस्र चीन के साथ बढ़ते रिश्तों को अपनी रणनीतिक साझेदारियों में विविधता लाने के अवसर के तौर पर देख रहा है।
बेल्ट एंड रोड से बढ़ी चीन की पहुंच
मिस्र को 2023 में ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके बाद चीन और मिस्र ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत सहयोग के लिए समझौते किए।
चीन मिस्र में 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 20 अरब डॉलर का बताया जाता है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका को चुनौती?
चीन लंबे समय से पश्चिम एशिया में अपनी कूटनीतिक भूमिका बढ़ा रहा है। 2023 में बीजिंग ने ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
चीन खुद को क्षेत्र में मध्यस्थ और स्थिरता कायम करने वाली ताकत के रूप में पेश करता रहा है। इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर भी बीजिंग दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।
स्वेज नहर क्यों है अहम?
मिस्र की स्वेज नहर पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में चीन के लिए मिस्र के साथ मजबूत रिश्ते रणनीतिक रूप से काफी अहम हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिस्र चीन के लिए व्यापक अरब और अफ्रीकी क्षेत्र तक अपनी पहुंच बढ़ाने का आधार भी बन सकता है।
सैन्य सहयोग भी बढ़ा
चीन और मिस्र के बीच सैन्य सहयोग भी मजबूत हुआ है। अगस्त में दोनों देशों ने मिस्र के कई सैन्य ठिकानों पर बहुदिवसीय हवाई अभ्यास किया था।
इस अभ्यास में पहली बार चीन के J-16 लड़ाकू विमानों और मिस्र के फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।





