नेपाल में आपदा के बाद अब किस बात का डर? चीन ने किया आगाह, भारत भी आ सकता है संकट की जद में?

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद भी खतरा टला नहीं है। तिब्बत में हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने महज 10 घंटे के भीतर नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। अब तक 359 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 1000 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
चीन ने नेपाल को एक और संभावित बाढ़ को लेकर आगाह किया है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन और मलबे से बनी अस्थायी झील में भारी मात्रा में पानी जमा हो रहा है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है तो निचले इलाकों में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
विशेषज्ञों ने नदियों में जमा मलबे, अस्थिर पहाड़ी ढलानों और लगातार भूस्खलन की आशंका के चलते बाढ़ की दूसरी और तीसरी लहर की चेतावनी भी दी है। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और ग्लेशियर क्षेत्रों की अस्थिरता ने खतरे को और गंभीर बना दिया है।
नेपाल में तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। चीन की चेतावनी के बाद प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। सवाल अब यह है कि अगर हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाएं लगातार बढ़ती रहीं तो क्या इसका असर नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती इलाकों तक भी पहुंच सकता है।





