राम मंदिर विवाद में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, ट्रस्ट-निर्माण समिति के रिश्तों में आई तल्खी

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण समिति के बीच बढ़ती दूरी अब बैठकों में भी साफ दिखाई देने लगी है। दोनों संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियों की एक-दूसरे की बैठकों से गैरमौजूदगी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की दो बैठकों में निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शामिल नहीं हुए। वहीं जुलाई और 19 से 21 अगस्त तक हुई निर्माण समिति की बैठकों में ट्रस्ट का कोई प्रमुख पदाधिकारी नजर नहीं आया।

पहले निर्माण समिति की बैठकों में ट्रस्ट की ओर से तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव की मौजूदगी रहती थी। हालांकि पदों में बदलाव के बाद समिति की बैठकों में ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब हो गया है।

चढ़ावा चोरी पर मुखर हुए थे नृपेंद्र मिश्र

छह जून को मामला सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने विभिन्न टीवी चैनलों को दिए साक्षात्कारों में घटना को चोरी नहीं बल्कि डकैती तक बताया था। हालांकि 23 जून के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलना लगभग बंद कर दिया।

इसके बाद छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में भी नृपेंद्र मिश्र शामिल नहीं हुए। वहीं निर्माण समिति की लगातार दो बैठकों में ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी की गैरमौजूदगी ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ती दूरी की चर्चाओं को और तेज कर दिया।

पहले साथ बैठकर होते थे फैसले

सूत्रों के अनुसार, पहले मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़े तमाम मुद्दों पर ट्रस्ट और निर्माण समिति के पदाधिकारी मिलकर चर्चा करते थे। मतभेद होने पर भी बातचीत के जरिए सहमति बनाने की कोशिश की जाती थी।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों से दूरी बनाते हुए अपना ध्यान मुख्य रूप से निर्माण कार्यों तक सीमित कर लिया। अब यही दूरी दोनों संस्थाओं के बीच संस्थागत खिंचाव के रूप में दिखाई दे रही है।

चंपत के कथित पत्र ने बढ़ाई सियासी और प्रशासनिक तपिश

इस बीच चंपत राय से जुड़े एक कथित पत्र के सामने आने के बाद ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच दरार की चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया। हालांकि नृपेंद्र मिश्र ने पत्र को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र देखा ही नहीं है। उन्होंने इसे माहौल खराब करने की कोशिश बताया।

नृपेंद्र मिश्र ने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए धन ट्रस्ट ने जुटाया है और निर्माण कार्य में केंद्र या राज्य सरकार के धन का इस्तेमाल नहीं किया गया।

बैठकों से गैरमौजूदगी पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच सब कुछ सामान्य है तो दोनों पक्षों की लगातार बैठकों में एक-दूसरे का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिखाई दे रहा? क्या यह केवल जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र के बंटवारे का मामला है या फिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं?

मामले पर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। वहीं ट्रस्ट के सचिव जगदीश आफले ने इसे ट्रस्ट का अंदरूनी मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इसी बीच ट्रस्ट के एक पूर्व लेखा प्रभारी ने चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय समेत कई अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और पूर्व में की गई शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।

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