मालवहन को मिलेगी नई रफ्तार, रेलवे के डेडीकेटेड कॉरिडोर में निवेश की संभावनाएं तलाशीं

भारतीय रेलवे में मालवहन व्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बेहतर इस्तेमाल को लेकर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय मालवहन संगोष्ठी में उद्योग जगत और रेलवे अधिकारियों के बीच अहम चर्चा हुई। कंपनियों ने रेलवे की मौजूदा मालवहन व्यवस्था में बड़े बदलावों के साथ आधुनिक तकनीक और नई नीतियों की जरूरत बताई।
राष्ट्रीय मालवहन संगोष्ठी में उद्योग जगत ने रेलवे के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। कंपनियों का कहना है कि माल और पार्सल वैगनों में निजी निवेश की अनुमति मिलने से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में तेजी से इजाफा हो सकता है। इसके साथ ही कम यातायात वाले समर्पित रेल गलियारों का अधिक प्रभावी उपयोग करने का सुझाव दिया गया, ताकि माल को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सके। सरकार भी निजी निवेश के जरिए कार्गो टर्मिनल जैसी रेल अवसंरचना को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।
संगोष्ठी में कम दूरी के कंटेनर परिवहन को लेकर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि सड़क और रेल परिवहन की लागत में बेहतर संतुलन बनाने की जरूरत है। बंदरगाह शुल्क, रेल मालभाड़े और अंतिम छोर तक माल पहुंचाने की लागत को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे उद्योगों को रेलवे के जरिए माल भेजने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे और सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
कॉनकॉर समेत कई बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने आधुनिक मशीनों और एक साथ अधिक सामान की लोडिंग-अनलोडिंग करने वाली नई प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया। लौह अयस्क जैसे भारी सामान की ढुलाई के लिए नए और आधुनिक वैगनों की खरीद को मंजूरी देने की मांग भी उठाई गई। कंपनियों का मानना है कि पर्याप्त संख्या में विशेष वैगन उपलब्ध होने से मालवहन की गति और क्षमता दोनों में सुधार किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों ने संगोष्ठी में मिले सुझावों को गंभीरता से लेने का भरोसा दिलाया है। भारतीय रेलवे लगातार मालवहन क्षेत्र को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। केंद्र सरकार ने भी 2026 के बजट में डानकुनी और सूरत के बीच नए समर्पित माल गलियारे की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य पूर्व-पश्चिम दिशा में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाना है।
माना जा रहा है कि निजी निवेश, आधुनिक तकनीक, नए वैगन और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बेहतर इस्तेमाल से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे माल की आवाजाही तेज होने, परिवहन लागत घटने और देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।





