चढ़ावा चोरी मामले का असर: राम मंदिर के 2743 नित्य दर्शन पास निरस्त, दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को उठानी पड़ रही दिक्कत

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद निष्प्रभावी किए गए 2743 नित्य दर्शन पासों की व्यवस्था अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इससे प्रतिदिन रामलला के दर्शन करने वाले साधु-संतों और स्थानीय श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन पासों की वैधता समाप्त हो चुकी है, उन्हें निरस्त किया जा रहा है, जबकि फिलहाल नए नित्य दर्शन पास जारी नहीं किए जा रहे हैं।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सुरक्षा और व्यवस्था की समीक्षा के तहत सभी नित्य दर्शन पासों को निष्प्रभावी कर दिया गया था। इसके बाद प्रत्येक पास की वैधता और पात्रता की जांच शुरू की गई। समीक्षा के दौरान जिन पासों की अवधि पूरी हो चुकी है, उन्हें अमान्य घोषित किया जा रहा है। हालांकि, उनकी जगह नए पास जारी न होने से नियमित दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

सबसे अधिक असर उन साधु-संतों और अयोध्या के स्थानीय श्रद्धालुओं पर पड़ा है, जो वर्षों से नित्य दर्शन पास के माध्यम से प्रतिदिन रामलला के दर्शन करते रहे हैं। पास निरस्त होने के बाद अब उन्हें सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लंबी कतारों में लगकर दर्शन करने पड़ रहे हैं। इससे बुजुर्गों और नियमित दर्शन करने वालों को अतिरिक्त असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट फिलहाल सभी पुराने पासों का सत्यापन कर रहा है। इस प्रक्रिया के पूरा होने तक नए नित्य दर्शन पास जारी नहीं किए जाएंगे। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नई पास व्यवस्था कब से लागू होगी और श्रद्धालुओं को नए पास कब मिल सकेंगे।

चढ़ावा चोरी मामले के बाद राम मंदिर में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। लॉकरों के सत्यापन, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और पास व्यवस्था की समीक्षा जैसी प्रक्रियाएं इसी क्रम का हिस्सा हैं। ऐसे में नियमित दर्शन करने वाले श्रद्धालु नई व्यवस्था लागू होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें पहले की तरह सुगम और नियमित दर्शन की सुविधा फिर से मिल सके।

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