BJP और शिवसेना का बड़ा ऐलान: स्थानीय निकाय चुनाव में साथ लड़ेंगे, पार्टी छोड़ने वालों पर लगेगी रोक

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच सोमवार देर रात महत्वपूर्ण बैठक हुई। बंद कमरे में हुई इस चर्चा में राज्य मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण भी शामिल थे। बैठक के बाद शिवसेना की ओर से जानकारी दी गई कि मुंबई, ठाणे सहित पूरे महाराष्ट्र में महायुति के रूप में मिलकर नगर निगम चुनाव लड़ने पर सकारात्मक सहमति बनी है।
दल-बदल पर रोक, गठबंधन में एकजुटता का संदेश
बैठक में सबसे अहम निर्णय यह लिया गया कि भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता अब एक-दूसरे की पार्टी में नहीं जा सकेंगे। इसे गठबंधन के भीतर संभावित तनाव रोकने और राजनीतिक एकजुटता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अगले 2–3 दिनों में सीटों पर चर्चा शुरू
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले 2–3 दिनों में स्थानीय स्तर पर सीटों को लेकर बातचीत शुरू होगी।
- किस नगर निगम में कौन सी सीट किस दल को मिलेगी
- उम्मीदवारों का चयन
- और संयुक्त चुनावी रणनीति
इन्हीं बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
महाराष्ट्र का बड़ा मुकाबला: महायुति बनाम महा विकास आघाड़ी
इन स्थानीय चुनावों में दो बड़े राजनीतिक गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है—
महालुति (सत्ता पक्ष): भाजपा + शिवसेना (शिंदे गुट) + एनसीपी (अजीत पवार गुट)
महा विकास आघाड़ी (विपक्ष): कांग्रेस + शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) + एनसीपी (शरद पवार गुट)
मुंबई और ठाणे जैसे महत्वपूर्ण नगर निगमों में यह चुनाव राजनीतिक शक्ति और जनसमर्थन की बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।
बैठक क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
प्रदेश में नगर निगम चुनाव लंबे समय से टलते आ रहे थे। ऐसे में फडणवीस–शिंदे की यह संयुक्त रणनीति दोनों दलों की मजबूती और तालमेल का संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है। विपक्ष भी आक्रामक तैयारी कर रहा है, इसलिए मुकाबला बेहद रोचक रहने वाला है।





