350 से ज्यादा फिल्मों में अमर हुए असरानी, अंतिम यात्रा में उमड़ा बॉलीवुड

अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां शायद ही किसी कलाकार पर अधिक सटीक बैठें जितनी कि गोवर्धन असरानी पर। भारतीय फिल्म और रंगमंच के दिग्गज कलाकार असरानी का निधन 84 वर्ष की आयु में हो गया। हास्य और चरित्र अभिनय के क्षेत्र में उन्होंने हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। आज भी उनकी फिल्म ‘शोले’ का आइकॉनिक डायलॉग “हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं” लाखों लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देता है।

उनके मैनेजर बाबू भाई थीबा ने असरानी के जीवन और उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए साझा किया कि दिग्गज अभिनेता हमेशा सादगी के साथ जीवन जीते थे। बाबू भाई ने बताया, “असरानी साहब कहा करते थे कि वे अपनी अंतिम विदाई में भी एक आम आदमी की तरह जाना चाहते हैं। वे फिल्मी सितारों को दी जाने वाली भव्य विदाई के बजाय शांतिपूर्ण और साधारण अंत चाहते थे।”

अन्नू कपूर जैसे साथी कलाकार, जो उम्र में असरानी से 15 साल छोटे हैं, ने भी उनकी सादगी और जीवन दृष्टिकोण को प्रेरणादायक बताया। उनके अनुभव और जीवन से जुड़े ये प्रसंग आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख और प्रेरणा बने रहेंगे।

बाबू भाई ने आगे कहा, “मैंने असरानी साहब के साथ बीते दो दशकों से अधिक समय में बहुत कुछ सीखा। उन्होंने मुझे एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी। उनके योगदान और आदर्श को हम हमेशा याद रखेंगे। परिवार की ओर से मैं प्रधानमंत्री मोदी और सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।”

असरानी का अंतिम संस्कार निजी तौर पर किया गया, जैसा कि उन्होंने चाहा था। उनका निधन 20 अक्तूबर की देर शाम हुआ, लेकिन यह खबर तब सार्वजनिक हुई जब उनके परिवार ने अंतिम संस्कार के बाद इसे साझा किया। फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग तक उनके निधन के बारे में दाह संस्कार के बाद ही जान सके। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया।

असरानी के जीवन और करियर की यह विरासत हमेशा स्मृति में रहेगी। उनकी सादगी, अभिनय की प्रतिभा और लोगों के दिलों में हास्य के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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