श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट ने दिसानायके सरकार को भेजा नोटिस, डिजिटल आईडी परियोजना से जुड़ा है मामला

कोलंबो: श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और पूरे मंत्रिमंडल को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारत की मदद से चल रही श्रीलंका यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी (एसएल-यूडीआई) परियोजना को लेकर दाखिल एक याचिका पर जारी किया गया है। यह याचिका पूर्व मंत्री विमल वीरेवांसा ने दाखिल की थी। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। साथ ही, इस परियोजना पर न तो संसद को और न ही आम जनता को ठीक से जानकारी दी गई।

अप्रैल महीने में एमओयू पर किया गया था हस्ताक्षर
बता दें कि इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलंबो यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत भारत के बड़े डिजिटल समाधान श्रीलंका को उपलब्ध कराए जाने हैं, ताकि देश में डिजिटल बदलाव की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

क्या है एसएल-यूडीआई परियोजना का उद्देश्य?
इस परियोजना का उद्देश्य हर नागरिक को एक सुरक्षित डिजिटल पहचान पत्र देना है, जो भारत के आधार कार्ड की तरह होगा। इसे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और श्रीलंका के डिजिटल इकोनॉमी मंत्रालय के सहयोग से लागू किया जा रहा है। यह पूरी तरह से भारत की तरफ से दिए गए अनुदान से वित्तपोषित है।

याचिकाकर्ता का दावा- कैबिनेट ने फैसलों में किया बदलाव
लेकिन याचिकाकर्ता विमल वीरेवांसा का आरोप है कि 2022 में भारत के साथ हुआ मूल समझौता श्रीलंका की कैबिनेट ने इस साल जनवरी और जून में किए फैसलों के बाद बदल दिया। इन बदलावों के चलते भारत को परियोजना की मुख्य तकनीकी संरचना पर नियंत्रण मिल गया है। इसमें मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर (एमएसआई) और बायोमेट्रिक डाटाबेस सॉफ्टवेयर (एमओएसआईपी) जैसे अहम हिस्से शामिल हैं।

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