5 सितंबर का मार्च अब नहीं होगा: सीजेपी ने लिया फैसला, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों का दिया जिक्र

नीट प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर चल रहे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लेने का फैसला किया है। पार्टी ने यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में उठाए गए कदमों के बाद लिया है।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पार्टी के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने पार्टी का बयान पढ़कर सुनाया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
केंद्र की पहल के बाद मार्च वापस
सौरव दास ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की पहल को देखते हुए सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च रद्द करने का फैसला किया है। पार्टी ने केंद्र की ओर से उठाए गए कदमों को मार्च वापस लेने का प्रमुख आधार बताया है।
13 एफआईआर रद्द करने की मांग
केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। मामले की सुनवाई शीर्ष अदालत में हो रही है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए मंगलवार को सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने बताया कि केंद्र की अंतरिम अर्जी प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को रद्द करने के लिए है और इसमें संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल की मांग की गई है।
दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल आवेदन में नीट प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों की कथित भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी जताई थी मंशा
18 अगस्त को छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एफआईआर रद्द करने की मंशा जताई थी। उस समय अदालत को बताया गया था कि एफआईआर वापस लेने में कानूनी जटिलताएं हैं।
बताया गया था कि मामलों को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके बंद किया जा सकता है, जिसे संबंधित मजिस्ट्रेट स्वीकार या खारिज करने का अधिकार रखता है।
छात्रों के मुआवजे को लेकर भी उम्मीद
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि नीट विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने को लेकर भी सकारात्मक प्रगति की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार की ओर से किए गए वादों पर नजर बनाए हुए है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी उन छात्रों और युवाओं के साथ खड़ा रहेगा, खासकर उन लोगों के साथ जिनके खिलाफ आंदोलन के दौरान कार्रवाई की गई थी।
जून में शुरू हुआ था आंदोलन
कथित नीट अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। यह आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त किया गया था। इसके बाद संगठन ने सरकार की ओर से अपनी अन्य मांगों पर किए गए आश्वासनों की समीक्षा भी की।
इससे पहले 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। उस दौरान सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। सीजेपी ने इसके बाद 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया था। अब पार्टी ने इस प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का फैसला किया है।





