यूपी: बृजेश गंझू का एनकाउंटर, नाम बदलते रहे लेकिन अपराधों का सिलसिला नहीं; राजनीति में भी आजमाया हाथ

उत्तर प्रदेश एटीएस ने रविवार तड़के वाराणसी के रामनगर इलाके में मुठभेड़ के दौरान 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को मार गिराया। एटीएस के मुताबिक, बृजेश प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का प्रमुख था। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी बाइक से मौके से फरार हो गया।
कई नामों से दर्ज था बृजेश का नाम
एटीएस के अनुसार, बृजेश गंझू कई नामों से पहचाना जाता था। उसके खिलाफ बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, उर्फ सरदार, उर्फ तुषार, उर्फ रंजन, उर्फ फूलचंद और उर्फ दुलारचंद जैसे नामों से मामले दर्ज थे।
उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज थे। एटीएस के मुताबिक, पुलिसकर्मी भी उसके निशाने पर रहते थे।
15 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम
एटीएस के मुताबिक, बृजेश ने करीब 15 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उसके खिलाफ हत्या का पहला मामला 1996 में दर्ज हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार, 1996 से 2025 के बीच उसके खिलाफ हत्या के छह और हत्या के प्रयास के छह मामले दर्ज हुए। वहीं, रंगदारी से जुड़े 18 मामले भी दर्ज थे।
2018 से टेरर फंडिंग के एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भी उसकी तलाश थी।
झारखंड में फैला था आपराधिक नेटवर्क
एटीएस के अनुसार, बृजेश का आपराधिक नेटवर्क झारखंड के सिमरिया और टंडवा थाना क्षेत्रों में सक्रिय रहा। सिमरिया थाना क्षेत्र में 1996 से 2018 के बीच हत्या, अपहरण, रंगदारी, सरकारी काम में बाधा, आर्म्स एक्ट और यूएपीए समेत आठ प्रमुख मामले दर्ज थे।
वहीं, टंडवा थाना क्षेत्र में 2014 से 2025 के बीच उसके खिलाफ 17 गंभीर मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। लावालौंग थाना क्षेत्र में भी अपहरण, रंगदारी, अवैध हथियार रखने और यूएपीए से जुड़े चार मामले दर्ज थे।
माओवादी संगठन से अलग होकर बना टीएसपीसी प्रमुख
एटीएस के मुताबिक, बृजेश पहले भाकपा माओवादी से जुड़ा था। बाद में उसने माओवादी संगठन से अलग होकर टीएसपीसी का नेतृत्व संभाला। पुलिस के अनुसार, वह झारखंड के चतरा, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, लातेहार और पलामू के अलावा बिहार के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भी सक्रिय रहा।
2010 में निर्विरोध मुखिया भी चुना गया
झारखंड पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, बृजेश 2010 में लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया था। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद भी उसकी उग्रवादी गतिविधियां जारी रहीं। उस पर कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने के आरोप थे। चतरा के टंडवा इलाके में दर्ज टेरर फंडिंग के मामलों में भी उसका नाम सामने आया था।
रामनगर में ऐसे हुआ एनकाउंटर
एटीएस के अनुसार, वाराणसी यूनिट को सूचना मिली थी कि बृजेश अपने साथियों के साथ सोनभद्र-मिर्जापुर के रास्ते वाराणसी सीमा में प्रवेश करने वाला है। इसके बाद एटीएस टीम ने रामनगर थाना क्षेत्र में घेराबंदी की।
रविवार तड़के रामनगर लंका मैदान के पास एटीएस ने बाइक सवार दो युवकों को रुकने का इशारा किया। आरोप है कि बाइक पर पीछे बैठे बृजेश ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया, जबकि बाइक चला रहा उसका साथी मौके से फरार हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बृजेश को मृत घोषित कर दिया।
हथियार और नकदी बरामद
एटीएस के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद बृजेश के पास से .32 बोर की दो पिस्टल, कार्बाइन, भारी मात्रा में कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए। मुठभेड़ के दौरान एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण के बुलेट प्रूफ जैकेट में भी गोलियां लगीं, हालांकि दोनों सुरक्षित रहे।
कुल 30 लाख रुपये का था इनाम
बृजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। एनआईए ने उस पर पांच लाख रुपये और झारखंड पुलिस ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। एटीएस के अनुसार, बृजेश के खिलाफ कुल 44 आपराधिक मामले दर्ज थे।
मुठभेड़ के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। बृजेश के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसके छोटे भाई सुरेश कुमार की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की गई।





