दिल्ली का नया मास्टर प्लान: पुराने इलाकों का होगा कायाकल्प, परिवहन से लेकर भूमि पूलिंग तक बड़े बदलाव

दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में राजधानी के विकास को नई दिशा देने की तैयारी है। नए क्षेत्रों को विकसित करने के साथ अब पुराने और कम इस्तेमाल वाले इलाकों के पुनर्विकास पर भी जोर दिया गया है। अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के आसपास आवास व रोजगार की सुविधाएं बढ़ाने और खाली या कम उपयोग वाली जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने की योजना है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दिल्ली में विकास सिर्फ नए इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। पहले से बसे क्षेत्रों को भी नए तरीके से विकसित करने पर जोर होगा। इससे पुरानी इमारतों, सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का रास्ता खुलेगा।

पुराने इलाकों में बढ़ेंगी सुविधाएं

मास्टर प्लान-2021 के दौरान दिल्ली के बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित करने के लिए आवासीय, व्यावसायिक, परिवहन और हरित क्षेत्रों के लिए भूमि उपयोग तय किया गया था। करीब दो दशक बाद राजधानी की जरूरतें काफी बदल चुकी हैं।

पुराने इलाकों में आबादी और निर्माण का घनत्व बढ़ा है। कई जगह इमारतें पुरानी हो चुकी हैं और सड़क, पार्किंग, पानी तथा दूसरी सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में मास्टर प्लान-2047 में पहले से बसे इलाकों की जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर नए मकान, सड़कें, सार्वजनिक स्थान और जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है।

मेट्रो के आसपास घर, नौकरी और बाजार

मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परिवहन को शहरी विकास का अहम आधार बनाया गया है। मेट्रो और अन्य बड़े सार्वजनिक परिवहन मार्गों के आसपास आवास, रोजगार, बाजार और जरूरी सुविधाओं को विकसित करने की नीति पर जोर रहेगा।

इसका मकसद लोगों को घर से काम और बाजार तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम करना है। परिवहन और आवास को एक-दूसरे से जोड़कर दिल्ली में यात्रा का समय और सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी।

अनधिकृत कॉलोनियों में सिर्फ नियमितीकरण नहीं, पुनर्विकास पर जोर

मास्टर प्लान-2021 के दौरान अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। अब मास्टर प्लान-2047 में इनके पुनर्विकास की दिशा में भी प्रावधान किया गया है।

इसके तहत कम से कम 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र को मिलाकर पुनर्विकास योजना तैयार करने का रास्ता दिया गया है। छोटे-छोटे भूखंडों को एक साथ जोड़कर सड़क, भवन और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है।

इससे घनी बसी कॉलोनियों में सड़क और दूसरी सुविधाओं को व्यवस्थित करने के साथ पुराने निर्माण को नए तरीके से विकसित करने का अवसर मिल सकता है।

औद्योगिक जमीन का भी होगा बेहतर इस्तेमाल

मास्टर प्लान-2047 में कुछ मौजूदा औद्योगिक जमीन के पुनः उपयोग का प्रावधान किया गया है। 2,000 वर्गमीटर या उससे बड़े पात्र औद्योगिक भूखंडों को तय शर्तों के तहत व्यावसायिक या सार्वजनिक-सामुदायिक उपयोग में बदला जा सकता है।

इससे ऐसी जमीन का इस्तेमाल बदलती जरूरतों के हिसाब से करने का रास्ता खुलेगा, जहां मौजूदा औद्योगिक गतिविधियों की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है।

200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लैंड पूलिंग से विकास

दिल्ली के नए इलाकों के नियोजित विकास में भूमि पूलिंग को भी अहम भूमिका दी गई है। डीडीए के मौजूदा भूमि पूलिंग ढांचे में 95 गांव और 109 क्षेत्र शामिल हैं। एक क्षेत्र का औसत आकार करीब 250 से 350 हेक्टेयर है।

मास्टर प्लान-2047 में भूमि पूलिंग व्यवस्था को ज्यादा लचीला बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत कम से कम 20 हेक्टेयर जुड़ी हुई जमीन वाले भू-स्वामियों के समूह को योजना में शामिल होने का रास्ता दिया गया है।

यानी आने वाले वर्षों में दिल्ली का विकास केवल नए निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। पुराने इलाकों के पुनर्विकास, बेहतर परिवहन, अनधिकृत कॉलोनियों के कायाकल्प और भूमि पूलिंग के जरिए राजधानी की तस्वीर बदलने की कोशिश होगी।

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